रांची:
दिगंबर जैन समाज (Digambar Jain Samaj) के नेतृत्व में मंगलवार यानि आज सुबह 9 बजे से अपर बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर से मौन जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस सम्मेद शिखरजी (Sammed Shikharji) में उपजे विवाद के निपटारे के लिए निकाला जा रहा है। इस मौन जुलूस में दिगंबर जैन समाज के अलावा श्वेताम्बर जैन समाज तेरापंथी समाज सहित अन्य कई लोग शामिल होंगे। जुलूस मंदिर परिषद से निकलकर शहीद चौक,कचहरी रोड होते हुए जाकिर हुसैन पार्क जाकर समाप्त होगा। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल की ओर से राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा।

तीर्थ स्थल घोषित किया जाए
दरअसल जैन समाज का सबसे बड़ा औऱ पवित्र तीर्थ स्थान झारखंड के गिरिडीह में है। जिसे ''श्री सम्मेद शिखर तीर्थ या पारसनाथ पहाड़ी के नाम से हम सब जानते हैं। जैनियों का यह सबसे प्रमुख आस्था का केंद्र है। केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर सम्मेद शिखरजी को टूरिस्ट प्लेस के तौर पर चिन्हित किया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने भी इस पर मुहर लगा दी। लेकिन जैन समाज के लोग ''श्री सम्मेद शिखर तीर्थ" को टूरिस्ट प्लेस बनाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। जैन समाज के लोगों की मांग है कि सम्मेद शिखर को टूरिस्ट प्लेस ना बनाया जाए। साथ ही इसे तीर्थ स्थल घोषित किया जाए। दरअसल सम्मेद शिखर जी को जैन समाज का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है। इनका कहना है कि टूरिस्ट प्लेस बनाने से तीर्थ की पवित्रता को खतरा है। जैन समुदाय की पीड़ा है कि यदि सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित किया गया तो यहाँ मांस, मदिरा का सेवन होगा जो जैनियों की मान्यता के अनुसार गलत है। कहते हैं कि जैन समाज के 24 में से 20 तीर्थांकरों ने यहीं पर मोक्ष प्राप्ति की थी। इस स्थान को दिगंबर जैन के साथ ही श्वेताम्बर जैन भी बेहद पवित्र मानते हैं। जैन धर्म के तीर्थराज के रुप में इसकी मान्यता है।

क्षेत्र की पवित्रता होगी बाधित
वहीं जैन धर्म के बड़े महाराज में से एक मुनि प्रमाणसागर महाराज भी इस विषय पर अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यह विरोध केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के कारण हो रहा है। इसे इको सेंसिटिव जोन बनाया गया था, अब इको टूरिज्म की बात आ रही है। चूंकि इको टूरिज्म शब्द जुड़ते ही लोगों के मन में ऐसी बात आ चुकी है कि टूरिज्म क्षेत्र घोषित होते ही क्षेत्र की पवित्रता बाधित होगी। उन्होंने कहा कि इसे पर्यटन घोषित करने की जगह काशी विश्वनाथ, वैष्णव देवी जैसा पवित्र तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाए। इसे लेकर सरकार से बातचीत चल रही है और ऐसी उम्मीद है कि बहुत जल्द जैन समाज की मांग सुनी जाएगी। हम लोग इसे लेकर काफी सकारात्मक भी हैं।