द फॉलोअप डेस्क/ दिल्ली :
आज प्रधानमंत्री का 76वां जन्मदिन है। यह तारीख उनके जीवन की उस लंबी सार्वजनिक यात्रा को याद करने का अवसर भी है, जो गुजरात के वडनगर से शुरू होकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संगठनात्मक जुड़ाव, भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल और 2014 के बाद केंद्र की सत्ता में नेतृत्व—नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर को दर्शाता है। उनके समर्थक इस यात्रा को सेवा, संगठन और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प से जोड़कर देखते हैं। वहीं, उनकी सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और चुनौतियों का मूल्यांकन राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग दृष्टिकोण से करते रहे हैं। प्रधानमंत्री के रूप में उनके तीसरे कार्यकाल तक पहुंची यह यात्रा शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक योजनाओं, तकनीक और भारत की वैश्विक भूमिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समेटे हुए है।
वडनगर से शुरू हुआ शुरुआती जीवन
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। एक साधारण परिवार से आने वाले मोदी का शुरुआती जीवन वडनगर में बीता। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी में उनके शुरुआती जीवन और सार्वजनिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। बचपन और युवावस्था के दौरान सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों से उनका जुड़ाव बढ़ा। आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनकी सक्रियता ने उनके सार्वजनिक जीवन की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। वडनगर से शुरू हुई यह यात्रा धीरे-धीरे गुजरात की राजनीति और फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंची।
संगठन की राजनीति से गुजरात के मुख्यमंत्री पद तक
नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। गुजरात की राजनीति में सक्रिय भूमिका के बाद वर्ष 2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में 2014 तक कार्य किया। मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल गुजरात के विकास, औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक नीतियों को लेकर चर्चा में रहा। इस दौरान उनके शासन को लेकर समर्थन और आलोचना, दोनों तरह के राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आए। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनका अनुभव आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका का आधार बना।
2014 में प्रधानमंत्री पद की शुरुआत
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही केंद्र की राजनीति में उनके नेतृत्व का नया अध्याय शुरू हुआ। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव के पश्चात 9 जून 2024 को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। तीसरे कार्यकाल तक पहुंचने के साथ नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में लंबे समय तक राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े प्रमुख अध्यायों में शामिल हो गया।
प्रधानमंत्री के रूप में लंबी राजनीतिक यात्रा और रिकॉर्ड
वर्ष 2026 नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल की अवधि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। 10 जून 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रस्ताव के अनुसार, उन्होंने लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए और जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। यह आंकड़ा लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल से संबंधित है। इस उपलब्धि को उनके समर्थक राजनीतिक निरंतरता के संदर्भ में देखते हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषण में इसे लंबे समय तक बने जनादेश और भारतीय राजनीति में आए बदलावों के साथ जोड़कर समझा जाता है। प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों की यात्रा में सरकार की नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों ने देश की राजनीतिक एवं नीतिगत दिशा को प्रभावित किया है।
जन-धन योजना से वित्तीय समावेशन तक
मोदी सरकार के कार्यकाल में सामाजिक कल्याण और वित्तीय समावेशन से जुड़ी कई योजनाओं को बड़े पैमाने पर लागू किया गया। इनमें प्रधानमंत्री जन-धन योजना प्रमुख है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक देश में 59 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोले जा चुके थे। इनमें लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि करीब 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं। जन-धन योजना का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से दूर आबादी को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना रहा है। बैंक खाते, बचत, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों को इस योजना से जोड़ा जाता है। हालांकि, वित्तीय समावेशन के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए खातों की संख्या के साथ उनके सक्रिय उपयोग, लेन-देन और लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति जैसे संकेतकों का भी अध्ययन आवश्यक है।
मुद्रा योजना और छोटे कारोबार को बढ़ावा
छोटे कारोबार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भी सरकार की प्रमुख पहलों में शामिल रही है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जून 2026 तक मुद्रा योजना के तहत 59.14 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए थे। इन ऋणों की कुल राशि 41.71 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। इस योजना के माध्यम से छोटे उद्यमियों और कारोबारियों को ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके प्रभाव का आकलन करते समय ऋण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या के साथ कारोबार की स्थिरता, रोजगार सृजन और ऋण चुकौती की स्थिति को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
जल जीवन मिशन से ग्रामीण परिवारों तक नल कनेक्शन
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जल जीवन मिशन को केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन पहुंचाना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 तक करीब 15.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। अगस्त 2019 में यह संख्या 3.23 करोड़ थी। इन आंकड़ों से योजना के विस्तार का पैमाना सामने आता है। हालांकि, नल कनेक्शन उपलब्ध होने के साथ नियमित जलापूर्ति, पानी की गुणवत्ता और रखरखाव भी योजना के प्रभाव का आकलन करने के महत्वपूर्ण आधार हैं। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य सरकारों की साझा भूमिका होती है। राज्यों की प्रशासनिक क्षमता और स्थानीय स्तर पर व्यवस्था योजना के परिणामों को प्रभावित करती है।
मेक इन इंडिया से स्टार्टअप इंडिया तक
मोदी सरकार के दौर में विकास का एजेंडा सामाजिक योजनाओं के साथ-साथ विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उद्यमिता पर भी केंद्रित रहा है। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों के जरिए देश में उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और नए कारोबार को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। सरकारी जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक स्टार्टअप इंडिया के तहत 2.23 लाख से अधिक स्टार्टअप को मान्यता मिली थी। इनसे 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की जानकारी दी गई है। स्टार्टअप क्षेत्र के विस्तार के साथ निवेश, नवाचार, रोजगार की गुणवत्ता और कारोबार के लंबे समय तक टिके रहने जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास भी मोदी सरकार के कार्यकाल के प्रमुख बदलावों में शामिल रहे हैं। 2026 में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में करीब 440 स्पेस-टेक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के माध्यम से निजी कंपनियों और स्टार्टअप को अंतरिक्ष गतिविधियों में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इस क्षेत्र में निजी निवेश, तकनीकी विकास, अनुसंधान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भारत के अंतरिक्ष उद्योग की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख पहलू हैं।
विकसित भारत 2047: तीसरे कार्यकाल का एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में ‘विकसित भारत 2047’ को एक प्रमुख राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की व्यापक परिकल्पना से जुड़ा है। इसके अंतर्गत आत्मनिर्भर भारत, रोजगार, महिला नेतृत्व, तकनीकी नवाचार, बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। हालांकि, किसी भी विकास लक्ष्य की सफलता का मूल्यांकन केवल सरकारी घोषणाओं और योजनाओं के विस्तार से नहीं किया जा सकता। रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानव विकास और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे संकेतकों के आधार पर नीतियों के वास्तविक प्रभाव को समझना आवश्यक होगा। इन क्षेत्रों में उपलब्धियां और चुनौतियां, दोनों ही सरकार के दीर्घकालिक एजेंडे के मूल्यांकन का हिस्सा बनती हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में भारत की विदेश नीति में रणनीतिक साझेदारियों, प्रवासी भारतीयों और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी को प्रमुखता मिली है। भारत-अमेरिका, भारत-जापान, भारत-ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों के साथ संबंधों के अलावा ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भागीदारी आर्थिक सहयोग, विकासशील देशों के मुद्दों और वैश्विक शासन व्यवस्था से जुड़े विमर्श का हिस्सा रही है। भारत की वैश्विक भूमिका को समझने के लिए आर्थिक क्षमता, तकनीकी विकास, सामरिक हितों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ-साथ बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी नजर डालना आवश्यक है।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा का व्यापक संदर्भ
वडनगर से शुरू होकर गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंची नरेंद्र मोदी की यात्रा भारतीय राजनीति में संगठन, नेतृत्व और चुनावी जनादेश के बीच संबंधों को दर्शाती है। 2014 के बाद उनकी सरकार के दौरान सामाजिक योजनाओं, डिजिटल सेवाओं, बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े कई कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया गया। इन पहलों के प्रभाव को लेकर समर्थकों और आलोचकों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। किसी भी सरकार के कार्यकाल को समझने के लिए उपलब्धियों के साथ नीतियों के क्रियान्वयन, सामाजिक प्रभाव, आर्थिक परिणाम और सामने आई चुनौतियों का भी अध्ययन करना जरूरी होता है।
17 सितंबर: जन्मदिन से आगे सार्वजनिक जीवन का पड़ाव
17 सितंबर नरेंद्र मोदी के जीवन में जन्मदिन की तारीख होने के साथ-साथ उनके सार्वजनिक जीवन की यात्रा को देखने का अवसर भी है। वडनगर से शुरू हुआ सफर संगठनात्मक राजनीति, गुजरात के मुख्यमंत्री पद और प्रधानमंत्री के रूप में तीन कार्यकाल तक पहुंचा है। उनके समर्थक इस यात्रा को सेवा, संकल्प और राष्ट्र प्रथम की राजनीति के रूप में देखते हैं। वहीं, विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोणों से उनके शासन की नीतियों, उपलब्धियों और चुनौतियों का मूल्यांकन किया जाता रहा है। यह निर्विवाद तथ्य है कि 2014 के बाद नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के राष्ट्रीय विमर्श में एक केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं। वर्ष 2026 तक उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति के एक लंबे और महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में सामने आया है।