द फॉलोअप डेस्क
ममता के बाद अब उद्धव की पार्टी के भी टूटने की खबर है। शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसद हुए बागी हो गये हैं। खबरों में बताया गया है कि इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश बिरला को शिंदे गुट में शामिल होने के लिए पत्र भेजा है। इधर, नई दिल्ली में उद्धव ठाकरे की शिवसेना में हो रही बगावत की चर्चाओं के बीच, जब पार्टी सांसद संजय राउत ने प्रेस के सदस्यों को संबोधित किया, तो उन्होंने "बागी" नेताओं के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। राउत ने पार्टी छोड़ने के शक वाले लोगों को गालियां दीं। राउत ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे उनकी गालियों को सेंसर न करें। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "इसे काटना मत, इसे चलाना।" राउत ने बागियों पर बेईमानी का आरोप लगाया और कहा, "ये लोग बेईमान हैं और बेईमानी उनके खून में है, हमें ऐसा महसूस होने लगा है।"
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पार्टी नेताओं को बचाव करना पड़ा
राउत के गुस्से और अपशब्दों के इस्तेमाल के बाद पार्टी नेताओं को उनका बचाव करना पड़ा। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सांसद अनिल देसाई ने कहा, "जो कुछ भी कहा गया, वे अपशब्द हैं, वे किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं कहे गए। जब कोई भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति, जिसने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में 50 साल बिताए हों, बोलता है, तो ऐसी बातें हो जाती हैं।" देसाई ने आगे कहा कि राउत किसी खास व्यक्ति को संबोधित नहीं कर रहे थे।

विरोधियों ने राउत की टिप्पणियों को मुद्दा बनाया
हालांकि, विरोधियों ने राउत की टिप्पणियों को मुद्दा बनाया और उन पर हमला किया। महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि राउत की भाषा सही नहीं थी। "मुझे लगता है कि उन्हें (बागी सांसदों को) इस तरह गाली देना और उनका अपमान करना सही नहीं था। यह सब लंबे समय से चल रहा होगा। नतीजा यह है कि आज सांसद उनके साथ नहीं रहना चाहते।" शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी राउत पर हमला किया और कहा कि यह भाषा उद्धव ठाकरे की पार्टी के पतन को दर्शाती है।
