द फॉलोअप डेस्क
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और भारत पर लगे आरोपों को लेकर भारत के ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्रंप के उस दावे को "राजनीतिक ड्रामा" बताया, जिसमें कहा गया था कि भारत, रूस से सस्ता तेल खरीदकर जबरदस्त मुनाफा कमा रहा है।
एनडीटीवी से बातचीत में गर्ग ने साफ कहा कि भारत अब अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं से लगभग हट चुका है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में, खासकर ट्रंप के 50% टैरिफ जैसे प्रस्तावों के बाद, कारोबार की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
भारत को नहीं हो रहा कोई 'बड़ा फायदा'
गर्ग ने CLSA की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत को रूसी तेल से सालाना 25 अरब डॉलर की बचत नहीं हो रही, जैसा ट्रंप दावा कर रहे हैं। हकीकत में यह बचत महज 2.5 अरब डॉलर के आसपास है। उन्होंने बताया कि शिपिंग, बीमा और अन्य लागतों को जोड़ने के बाद भारत को रूसी तेल पर केवल 3-4 डॉलर प्रति बैरल की ही छूट मिलती है।.jpeg)
गर्ग ने कहा कि ट्रंप इन आंकड़ों को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन भारत का व्यवहार वैश्विक मूल्य-सीमा के भीतर ही रहा है और इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं तोड़ा गया है।
अमेरिका-भारत व्यापार तनाव को लेकर गर्ग ने कहा कि ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के चलते भारत पहले ही वार्ता से हटने को मजबूर हुआ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत को पूरी तरह से बातचीत के रास्ते बंद नहीं करने चाहिए क्योंकि भविष्य में बदलाव की संभावना बनी रहती है।.jpg)
नीति में लचीलापन जरूरी: गर्ग
गर्ग ने भारत सरकार से आग्रह किया कि खासतौर पर कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं की बातचीत में कुछ लचीलापन दिखाया जाए। उन्होंने उदाहरण दिया कि तेल और डेयरी जैसे उत्पादों के आयात से किसानों को बड़ा नुकसान नहीं होता। यह ज्यादा उपभोक्ताओं की पसंद और विकल्प का मामला है, न कि सिर्फ घरेलू उत्पादन की रक्षा का। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोहराया था कि भारत अपने किसानों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि "किसानों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और उसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं even अगर इसका व्यक्तिगत राजनीतिक असर हो"।