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टनल से श्रमिकों को निकालने के लिए इन 5 प्लान पर चल रहा काम, कितने दिन और?

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द फॉलोअप डेस्कः 
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सुरंग से 41 मजदूरों को निकालने के लिए तमाम तरह की कोशिशें की जा रही है। तरह-तरह के प्लान पर काम चल रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन का आज 16वां दिन है। बता दें कि मजदूरों को बाहर निकालने के लिए पांच योजनाओं पर काम चल रहा है। वैकल्पिक रास्ता तैयार करने के लिए रविवार को सुरंग के वर्टिकल ‘ड्रिलिंग’ शुरू की गई और पहले दिन करीब 20 मीटर खुदाई कर ली गई। ये उन पांच विकल्पों में से एक विकल्प है, जिसके जरिए मजदूरों को सकुशल बाहर लाया जाएगा। रेस्क्यू ऑपरेशन में अब भारतीय सेना भी जुट गई है। 


वर्टिकल एस्केप के लिए 86 मीटर तक ड्रिल किया जाएगा
वर्टिकल एस्केप पैसेज बनाने के लिए 86 मीटर तक ड्रिल किया जाएगा, ताकि मजदूरों तक पहुंचा जा सके। रविवार शाम तक 19.5 मीटर तक खुदाई की गई। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने बताया है कि अगर कोई परेशानी नहीं होती है, तो गुरुवार तक वर्टिकल ड्रिलिंग का काम पूरा हो जाएगा। एस्केप पैसेज बनाने के लिए ड्रिलिंग करके 700 मिमी पाइप मलबे के अंदर डाले जा रहे हैं। इससे कुछ दूरी पर, इससे पतले 200 मिमी व्यास के पाइप अंदर डाले जा रहे हैं जो 70 मीटर तक पहुंच चुके हैं। 


वर्टिकल बोरिंग का ऑप्शन चुना गया 
सुरंग के सिल्क्यारा-छोर से हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग के दौरान मिली असफलताओं के बाद वर्टिकल बोरिंग का ऑप्शन चुना गया था। सिल्क्यारा छोर पर लगभग 60 मीटर का मलबा रास्ते में बाधा बन गया था। हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बड़ी ऑगर ड्रिल शुक्रवार को फंस गई, जिसके वजह से अधिकारियों को 25 टन की मशीन को छोड़ना पड़ा और उन्हें रेस्क्यू के अन्य तरीके खोजने पड़े हैं। एक और तरीका बगल से ड्रिलिंग करना है। हालांकि, इसके लिए अभी तक जरूरी मशीनरी घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाई है। एनडीएमए सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने कहा कि रविवार रात तक मशीनों को सुरंग हादसे वाली जगह पर पहुंचना था। उनके जरिए ही मजदूरों तक पहुंचने के 17 मीटर के रास्ते को साफ किया जाना था। 


बचाव सुरंग बनाने की योजना पर भी काम चल रहा 
सुरंग के बड़कोट छोर से ब्लास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल करके 483 मीटर लंबी बचाव सुरंग बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। रविवार सुबह तक पांच धमाके 10-12 मीटर के क्षेत्र में हो चुके हैं। हसनैन ने कहा कि बचाव अभियान में तेजी लाने के लिए प्रतिदिन तीन विस्फोट करने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि फंसे हुए मजदूरों के लिए सुरंग के भीतर रोशनी, ऑक्सीजन, भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध हैं। इससे पहले, ऑगर ड्रिलिंग मशीन के खराब होने की वजह से बचाव अभियान रुकने के बाद उन्हें तनाव से राहत पाने के लिए मोबाइल फोन और बोर्ड गेम उपलब्ध कराए गए थे। 


एक नजर में पढ़े पांच योजनाओं को 
योजना-1- सिलक्यारा की तरफ से आठ सो एमएम के पाइप में फंसी ऑगर - मशीन को बाहर निकाला जा रहा है। इसके बाद आगे की खुदाई मैनुअल तरीके से की जाएगी।

योजना-2- बड़कोट छोर की ओर से टीएचडीसी ने चार धमाके कर 10.7 मीटर अंदर तक राह बना ली है। यहां दो मीटर चौड़ाई का पाइप 483 मीटर तक बिछाया जाना है।

योजना-3- एसजीवीएनएल ने सुरंग के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग कर एक मीटर चौड़ा पाइप 19.2 मीटर तक पहुंचा दिया है। यहां कुल 86 मीटर पाइप ड्रिल किया जाना है।

योजना-4- आरवीएनएल भी सुरंग के ऊपर एक अन्य स्थान पर वर्टिकल ड्रिलिंग कर रास्ता बनाएगी। इसके लिए मशीनें पहुंच गई हैं व उनके लिए प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है।

योजना-5- बड़कोट की तरफ से वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए ओएनजीसी ने फील्ड सर्वे कर लिया है। बीआरओ ने मशीनों को पहुंचाने के लिए 975 मीटर सड़क तैयार की है।

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