द फॉलोअप टीम, रांची
बीआइटी सिंदरी में असिस्टेंट प्रोफेसर और पॉलिटेकनिक कॉलेजों में व्याख्याता नियुक्ति का मामला लटकता नजर आ रहा है। जेपीएससी ने इंटरव्यू लेने की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन अब खबर है कि सरकार जेपीएससी को नये सिरे से अधियाचना भेजेगी। इसमें बीआइटी सिंदरी व पॉलिटेक्निक कॉलेजों से अद्यतन रिक्त पदों की संख्या मंगाकर जोड़ा जायेगा। इन पदों का आरक्षण रोस्टर क्लियर करने के बाद आयोग को भेजा जायेगा।
स्थायी व्याख्याता की कमी
दरअसल राज्य सरकार जेपीएससी से बीआइटी सिंदरी में असिस्टेंट प्रोफेसर और पॉलिटेकनिक कॉलेजों में व्याख्याता नियुक्ति का प्रस्ताव वापस ले लेगी। इससे बीआईटी सिंदरी में 70 असिस्टेंट प्रोफेसर और पॉलिटेकनिक कॉलेजों में 80 व्याख्याता नियुक्ति के मामले को सलटाने में कितना समय लगेगा, यह कहना मुश्किल है। बता दें कि बीआइटी सिंदरी में असिस्टेंट प्रोफेसर सहित 17 पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लंबे समय से स्थायी व्याख्याता की कमी है।
अनुबंध पर रखे गए हैं शिक्षक
हालात ये है कि पठन-पाठन के लिए अनुबंध पर शिक्षकों को रखा गया है। आयोग द्वारा बीआइटी सिंदरी में वर्ष 2017 से ही विद्युत अभियंत्रण के 14 पद, दूरसंचार अभियंत्रण के छह पद, यांत्रिकी अभियंत्रण के नौ पद, धातु अभियंत्रण के चार पद, रासायनिक अभियंत्रण के नौ पद, खनन अभियंत्रण के छह पद, सूचना तकनीक के दो पद और कंप्यूटर विज्ञान के चार पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है।
पॉलिटेक्निक कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य भी नहीं
इधर इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कई नये ब्रांच खुल गये हैं, लेकिन इनमें अब तक पद सृजन नहीं किया गया है। नये इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षक नियुक्ति के लिए भी पद सृजन किये जाने हैं। पॉलिटेक्निक कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य भी नहीं हैं।
नए प्रस्ताव भेजने में और देर होगी
बताया गया कि बीआइटी सिंदरी और पॉलिटेनिक कॉलेजों से रिक्त पदों की संख्या मंगाकर इसमें जोड़ा जाएगा। इसी के साथ पदों का आरक्षण रोस्टर क्लियर करने के बाद आयोग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि नए प्रस्ताव भेजने में और देर हो सकती है। बता दें कि आयोग द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर और नियुक्ति के लिए जिन उम्मीदवारों से आवेदन मंगा लिया गया है, उन्हें नए प्रस्ताव के तहत फिर से आवेदन देने की जरुरत नहीं होगी। इसके बाद की प्रक्रिया में भी अब उम्मीदवारों की उम्र सीमा में छूट देने के लिए शिक्षा विभाग को प्रस्ताव बना कर कैबिनेट से स्वीकृत कराना होगा।