द फॉलोअप टीम, रांची:
कोरोना की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। कोरोना संक्रमितों का नया आंकड़ा रोज रिकॉर्ड बना रहा है। लोग दहशत में हैं। इस बीच रांची में स्वास्थ्य विभाग की कारस्तानी ने कोढ़ में खाज का काम किया है। होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे संक्रमितों को एक्सपायरी दवा बाटंने का मामला सामने आया है। रांची और बुंडू में करीब 100 संक्रमितों को एक्सपायरी दवा बांट दी गई।
मुख्यमंत्री कोरोना राहत किट का वितरण
गौरतलब है कि होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों को मुख्यमंत्री कोरोना राहत किट योजना के तहत दवाइयों की आपूर्ति की गई थी। दवाई मिलने पर कुछ मरीजों ने एक्सपायरी डेट वाली दवा की तस्वीर खींची और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। बात जिला प्रशासन तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। गौरतलब है कि किट में दी गई दवा लेवोसेल-एम दवा नवंबर 2021 में ही एक्सपायर हो चुकी है। नई दवा की एक्सपायरी डेट मार्च 2023 है। उपायुक्त ने मामले की जांच का आदेश दिया है।

होम आइसोलेशन वाले मरीजों को दी थी दवा
गौरतलब है कि होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे मरीजों को राहत किट का वितरण किया जाना था। शुक्रवार को इसका वितरण किया गया। पता चला कि रांची और बुंडू के तकरीबन 100 मरीजों को एक्सपायरी दवा बांट दी गई है। दरअसल, किट में पुरानी दवा को हटाकर नई दवा डालना था, लेकिन कई पैकेट्स में पुरानी दवा ही भरकर बांट दिया गया।
अधिकारियों ने दूसरों पर फोड़ा मामले का ठीकरा
मामला सामने आने के बाद अधिकारी लापरवाही का ठीकरा एक-दूसरे के सिर पर फोड़ रहे हैं। रांची के सिविल सर्जन ने कहा कि किट तैयार करने के लेकर इसे बांटने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात डिस्ट्रिक प्रोग्राम मैनेजर समरेश कुमार को दिया गया था। पहले ही दिन लापरवाही बरती गई। गौरतलब है कि दूसरी लहर के दौरान ये किट तैयार की गई थी। उस समय बड़ी संख्या में किट बच गया था। ऐसे में जब तीसरी लहर आई तो किट में दवा बदलकर बांटने की योजना बनाई गई।

सिविल सर्जन ने अपील जारी करके क्या कहा है
सिविल सर्जन कार्यालय ने अब अपील जारी की है। मरीजों से कहा कि किट में मौजूद लेवोसेल-एम नाम की दवा एक्सपायर हो चुकी है। जिनकी भी किट में वो दवा हो इसका सेवन ना करें। जिनको भी एक्सपायरी दवा मिली है वो इंसीडेंट कमांडर से संपर्क कर दवा बदलवा सकते हैं। सिविल सर्जन कार्यालय के भंडार से भी दवा बदली जा सकती है। अपील भी जारी हो गई। कार्रवाई का आश्वासन भी मिला है लेकिन क्या इस लापरवाही की कोई जवाबदेही नहीं बनती। ऐसे ही पल्ला झाड़ लिया जायेगा।
लोगों का विश्वास हासिल करना मुश्किल होगा
कोरोना महामारी की शुरुआत से ही वायरस, बीमारी के लक्षण, वैक्सीन के प्रभाव और दवाओं को लेकर भ्रम और अफवाह का माहौल है। लोगों को महामारी के प्रति बड़ी मुश्किल से जागरूक किया जा सका है। बड़ी मुश्किल से वैक्सीनेशन के लिए मनाया गया है। ऐसे में यदि मरीजों को एक्सपायरी दवा बांट दी जायेगी। कोई अनहोनी हो जाती है तो फिर लोगों का विश्वास हासिल करना बहुत मुश्किल हो जायेगा। खैर, सरकार और नौकरशाहों को इससे क्या ही फर्क पड़ता है। हाईकोर्ट भी कहते-कहते थक गया है।