नेहा सिंह राठौर, पटना:
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक जगह है अजगरा। अजगरा वही जगह है जहाँ एक तालाब के किनारे यक्ष-युधिष्ठिर संवाद हुआ था। अजगरा में वो तालाब अभी भी मौजूद है। इस संवाद में यक्ष ने युधिष्ठिर से दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य पूछा था और युधिष्ठिर ने जवाब दिया था कि रोज लाखों लोग मर जाते हैं। फिर भी बचे हुए लोग ऐसे बर्ताव करते हैं, जैसे वो कभी नहीं मरेंगे। इन लोगों में से ज्यादातर ऐसे हैं जो अपने कर्मों पर तब तक विचार नहीं करते, जब तक उसके बुरे परिणाम इन्हें खुद न झेलने पड़ जाएं।
ऐसे लोग कभी खूब सारा धुंआ फैलाकर, जंगल काटकर, नदियों में कचरा बहाकर हमारे भौतिक पर्यावरण को बर्बाद करते हैं, तो कभी राजनीति करते हुए इतनी नफरत फैलाते हैं। इतना भ्रष्टाचार करते हैं कि लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। स्वास्थ्य-शिक्षा इत्यादि मूल सुविधाओं के बिना ही जीवन गुजार देते हैं।
सांस्कृतिक प्रदूषण फैला रहे कुछ लोग
इसी तरह कुछ लोग सांस्कृतिक प्रदूषण फैलाते हैं और कला-संगीत के नाम पर इतनी अश्लीलता फैलाते हैं कि समाज का माहौल गंदा हो जाता है। ये लोग अपने किये पर तब तक विचार नहीं करते, जब तक इनके कर्मों का फल इनके अपने और करीबी लोगों को नहीं भुगतना पड़ जाता। जंगल काटने और प्रदूषण फैलाने वाले लोग अपने कर्मों पर तब-तक विचार नहीं करते, जब तक उनका कोई अपना बीमार नहीं हो जाता।
नफरत की राजनीति करने वाले
नफरत की राजनीति करने वाले, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले नेता तब तक अपने कर्मों पर पछतावा नहीं करते, जब तक उनके अपने लोग उनके कर्मों का बुरा फल नहीं भुगत लेते। ठीक इसी तरह कला-संगीत के नाम पर अश्लीलता फैलाने वालों को तब तक कोई दिक्कत नहीं होती, जब तक बात दूसरों की होती है। पर जिस दिन उनकी फैलाई गंदगी के छीटे खुद उनके घर में आने लगते हैं, वो तिलमिला जाते हैं।
भोजपुरी की अस्मिता से खिलवाड़ न करें
मैं किसी व्यक्ति की बात नहीं करूंगी क्योंकि ज्यादातर गायक और गीतकार यही कर रहे हैं। पर उनसे ये जरूर कहूंगी कि भोजपुरी की अस्मिता से खिलवाड़ न करें।
इन्हें समझना होगा कि इनका फूहड़पन भोजपुरी को स्वतंत्र भाषा के रूप में स्थापित नहीं होने देगा। अगर हम वाकई संविधान की आठवीं अनुसूची में 23वीं भाषा के रूप में भोजपुरी को देखना चाहते हैं, तो इन जाहिलों को अपना छिछोरापन बन्द करना होगा. अगर भोजपुरी बोलने वाले इसकी इज्जत नहीं करेंगे तो और कौन इसकी इज्जत करेगा???
अपने हितों के लिए औरतों का हक़ न मारें
भोजपुरी को बदनाम करने में उन्होंने वैसे भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। समाज की सारी कुंठा उनके गीतों में ही निकल के आती है। उन्हें समझना होगा कि हमारा भोजपुरी समाज सिर्फ मर्दों का नहीं है, इसमें आधा हिस्सा हम औरतों की भी है। उन्हें कोई हक नहीं कि अपने हितों के लिए हमारे हक़ मारें। हमें एक साफ-सुथरे समाज में रहने का पूरा अधिकार है और संविधान का अनुच्छेद 21 हमारे इस अधिकार का रक्षक है। फिलहाल बस इतना ही, पर भोजपुरी गीतों में अश्लीलता के विरुद्ध मेरी ये मुहिम जारी रहेगी।
( बक्सर निवासी लेखिका मशहूर भोजपुरी लोकगायिका हैं। इनके वीडियो बहुत वायरल होते हैं। इनके गीत सामाजिक और राजनीतिक विपरीतताओं के खिलाफ चुटीले होते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा ग्रहण की है।)
नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। द फॉलोअप का सहमत होना जरूरी नहीं। हम असहमति के साहस और सहमति के विवेक का भी सम्मान करते हैं।