प्रकृति का महापर्व सरहुल गढ़वा में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। सरहुल के मौके पर शनिवार को झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश कुमार ठाकुर नगदरवा गांव पहुंचे। वहां आदिवासी परिवारों के साथ पूर्व मंत्
लोहरदगा जिले में सरहुल त्योहार हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आदिवासी संगठनों, पहान और पुजारियों ने मिलकर केंद्रीय शोभायात्रा निकाली, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। झखरा कुंबा स्थित सरना स्थल पर विधिवत पूजा-अर्च
सरहुल आदिवासी समाज का सबसे महत्वपूर्ण और खूबसूरत त्योहार है, जो प्रकृति से उनके गहरे रिश्ते को दर्शाता है। इसी पर्व के साथ नए साल की शुरुआत होती है और फसलों की कटाई का समय भी आ जाता है। सरहुल दो शब्दों से मिलकर बना है—‘सर’ और ‘हुल’। ‘सर’ का मतलब सखुआ (साल