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BIHAR : हैंड-फुट और माउथ डिजीज के 5 मरीज मिले, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

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मुजफ्फरपुर:
बिहार में हैंड-फुट और माउथ डिजीज (hand-foot and mouth disease) के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग (Health Department) में हड़कंप मच गया है। हैंड-फुट और माउथ डिजीज के राज्य में एक साथ 5 मरीज मिले है। यह बीमारी 4-6 साल के बच्चों में ज्यादा पाई जाती है। मुजफ्फरपुर के 5 बच्चों में यह बीमारी मिली है। महाराष्ट्र, पुणे, चंडीगढ़ और दिल्ली के बाद बिहार के मुजफ्फरपुर के यह मामला सामने आया है। सभी का इलाज किया जा रहा है।

CM द्वारा सभी सरकारी अस्पताल में जारी किया गया अलर्ट 
बुधवार को मुजफ्फरपुर के जिन बच्चों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है वो सभी एक ही निजी स्कूल के बताए गए हैं। जिसके बाद सीएस द्वारा सभी सरकारी अस्पताल के साथ-साथ निजी अस्पताल के लिए भी अलर्ट जारी किया गया है। इस मामले में एक सीविल सर्जन ने बताया कि एक निजी चिकित्सक के यहां इस तरह के केस की जानकारी मिली है। जिले के सभी PHC को अलर्ट कर दिया गया है और अगर किसी भी PHC और CHC में ऐसे लक्षण वाले मरीज आते हैं तो इसकी सूचना विभाग को देना है।


बीमारी के लक्षण
यह बहुत संक्रामक बीमारी है। इसका वायरस बहुत तेजी से फैलता है लेकिन, 7 से 10 दिनों में यह अपने आप ठीक हो जाता है। सबसे पहले फीवर आता है। गले में दर्द होता है और बच्चा चिड़चिड़ा हो जाता है। हाथ-पैर व मुंह में फफोलेदार दाने बन जाते हैं। सबसे ज्यादा मुंह में दाने बनते हैं, इसमें जीभ, तालु और गाल के अंदर बनते हैं, इस स्थिति में बच्चा खाना नहीं खा पाते। सबसे महत्वपूर्ण है कि संक्रमित बच्चों को आइसोलेट करें। तेज बुखार होने पर पैरासिटामोल की गोली और एक लोशन दिया जाता है। जिसे लगाने से एक सप्ताह में संक्रमण समाप्त हो जाता है। 
कैसे फैलती है बीमारी
एक डॉक्टर ने कहा कि वायरस से होने वाली यह बीमारी काफी संक्रामक है। यह सांस के जरिए फैलती है। संक्रमित मरीज के करीब जाने, उसके ड्रॉपलेट्स, उसके इस्तेमाल की गई चीजों के संपर्क में आने से हो सकती है। अगर किसी एक बच्चे को हो गई तो उसके संपर्क में आने से दूसरे बच्चे को भी हो सकती है।


क्या है इलाज
डॉक्टर विकास तनेजा ने कहा कि इसका लक्षण के अनुसार ही इलाज होता है। इस वायरस के खिलाफ कोई दवा नहीं है। अगर फीवर हो रहा है तो उसकी दवा दी जाती है, गले में दर्द हो रहा है तो उसके लिए दवा दी जाती है। अमूमन 5 से 7 दिनों में यह ठीक हो जाती है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल में बीमारी है तो वायरस को फैलने से रोकने के लिए स्कूल बंद कर देना चाहिए ताकि संक्रमण के विस्तार पर रोक लगे। जिस भी बच्चे को यह बीमारी है, उसे पहले डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज लेना चाहिए। इसके बाद मरीज को आइसालेट कर दें, ताकि वे बाकी बच्चों से दूर रहें। उसके संपर्क में आने से दूसरे बच्चों को बीमारी का खतरा है। साफ-सफाई का खास ख्याल रखें, हाइजीन मेंटेन रखें।