पश्चिमी सिंहभूम:
पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में मानव तस्करी के एक बड़े और संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस, श्रम विभाग और चाइल्डलाइन की संयुक्त कार्रवाई में शहर के K2 होटल से 36 महिला-पुरुष समेत 6 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया है। सभी को बंधुआ मजदूरी के लिए गुजरात भेजने की तैयारी चल रही थी। कार्रवाई के दौरान मजदूरों को ले जाने के लिए होटल के बाहर खड़ी राजलक्ष्मी ट्रेवल्स की बस (OR 11H-0797) को भी जब्त किया गया। मौके से गुजरात निवासी 2 मानव तस्करों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पोड़ाहाट SDPO को मिली थी सूचना
दरअसल, रविवार देर रात पोड़ाहाट अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को सूचना मिली थी कि चक्रधरपुर स्थित K2 होटल में बड़ी संख्या में मजदूरों और नाबालिग बच्चों को संदिग्ध परिस्थितियों में ठहराया गया है। उन्हें अवैध तरीके से दूसरे राज्य भेजने की तैयारी की जा रही है। सूचना मिलते ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), श्रम विभाग, चाइल्डलाइन और पुलिस की संयुक्त टीम बनायी गयी। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, चक्रधरपुर के नेतृत्व में विशेष छापेमारी अभियान चलाया गया।

6 नाबालिग लड़के और 1 लड़की को मुक्त कराया
इसके बाद चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और पुलिस बल ने होटल K2 की घेराबंदी कर दबिश दी। छापेमारी के दौरान होटल से बड़ी संख्या में मजदूरों और बच्चों को बरामद किया गया। पुलिस ने सभी को सुरक्षित बाहर निकालकर पूछताछ शुरू की। मुक्त कराये गये 6 नाबालिगों में 5 लड़के और 1 लड़की शामिल हैं। बाल कल्याण समिति (CWC) चाईबासा के निर्देश पर सभी बच्चों को चाइल्डलाइन को सुपुर्द कर सेफ होम भेजा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और आगे की कानूनी प्रक्रिया की जायेगी।

गुजरात के 2 आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस ने मौके से गुजरात के मोरवी निवासी निकुंज गोविंद बोरसानिया (32) और कादिवर निलेश भाई (34) को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि वे मजदूरों और बच्चों को बहला-फुसलाकर दूसरे राज्यों में ले जाकर बंधुआ मजदूरी कराते थे। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), बाल श्रम अधिनियम और मानव तस्करी से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत चक्रधरपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
कई गंभीर सवाल छोड़ गई कार्रवाई
इस पूरे मामले ने झारखंड से जारी मानव तस्करी के नेटवर्क की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने ला दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों और बच्चों को होटल में किसकी शह पर रखा गया था। क्या स्थानीय स्तर पर भी इस नेटवर्क के तार जुड़े हैं? उन्हें गुजरात में किस काम के लिए ले जाया जा रहा था? फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों, स्थानीय एजेंटों और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी है।