रांची:
श्रावण मास (shravan month) की अंतिम सोमवारी को लेकर सुबह से ही शिव मंदिर में भारी भीड़ जुटी हुई है। शिवभक्त भोले भंडारी को जलाभिषेक कर रहे हैं। वहीं रांची के पहाड़ी मंदिर (Pahari Mandir), खूंटी के अमरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। सुबह से ही भक्त भगवान भोले की पूजा के लिए कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। से देखते हुए मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के इंतजाम भी किए गए हैं।
बोलबम के जयकारे से गूंजा बाबा बैद्यनाथ मंदिर
वहीं देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में देश के कोने कोने से कांवरिया जुट रहे हैं। बिहार के सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बाबा भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने को लेकर भक्त पहुंच रहे हैं। शहर की गली-गली में बोलबम का नारा गूंज रहा है। भक्त बाबा की आराधना में पूरी तरह लीन है।भक्तों की इसी श्रद्धा और कठोर तप से भोलेबाबा प्रसन्न होते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

सावन सोमवार का महत्व
हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सनत कुमारों ने महादेव से उन्हें सावन माह प्रिय होने का कारण पूछा तो महादेव भगवान शिव ने बताया था कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योग शक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया।