द फॉलोअप, रांची
विभागीय सचिव के टेबल पर ही परिवहन का चक्का जाम हो गया है। संचिकाएं महीनों-महीनों से फंसी हुई रहती है। कनीय अधिकारी से लेकर वरीय अधिकारी तक परेशान हैं। अब स्थिति यह है कि विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ भी नाराज हो उठे हैं। उन्हें पीत पत्र लिख कर विभागीय सचिव राजीव रंजन को ससमय विभागीय कार्यों का निबटारा करने का निर्देश देना पड़ रहा है। हालांकि द फॉलोअप के पास कई ऐसे पीत पत्र हैं जिसे जूनियर अधिकारियों को मजबूर होकर अपने सचिव को लिखना पड़ा है। उसमें कहा गया है कि कई महत्वपूर्ण संचिकाएं विभागीय सचिव के यहां काफी दिनों से लंबित है। उस पर निर्णय नहीं हो रहा है। इससे परिवहन विभाग के सामान्य कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। परिवहन विभाग में सामान्य काम-काज इस तरह उलझ गयी है कि जूनियर अधिकारियों को कार्यपालिका नियमावली की भावनाओं से इतर जाकर पीत पत्र लिखना पड़ रहा है। नियमावली की धारा-8 के अनुसार विभागीय कार्यों के संपादन के लिए सचिव या प्रधान सचिव जिम्मेवार बनाए गए हैं। अर्थात यह देखने का काम विभागीय सचिव का है। बावजूद कनीय अधिकारियों को भी मजबूर होकर अपने ही सचिव को पीत पत्र लिखना पड़ रहा है।

परिवहन विभाग में कार्यों को लटकाने या अटकाने की स्थिति किस स्तर पर पहुंच गयी है, इसका उदाहरण मंत्री दीपक बिरुआ का पत्र है। विभाग के मंत्री दीपक बिरुआ को मजबूर होकर अपने सचिव को इस तरह का पीत पत्र लिखना पड़ा है। पीत पत्र में बिरुआ ने स्मार्ट कार्ड (DL & RC) मुद्रण परियोजना निविदा आमंत्रण कार्य का मुद्दा उठाया है, जो अब तक लंबित है। बिरुआ ने लिखा है कि वह पूर्व में ही अपेक्षित स्वीकृति प्रदान कर चुके हैं। इसलिए संबंधित संचिका को प्राथमिकता के आधार पर सभी आवश्यक औपचारिकताएँ शीध्र पूर्ण कराएँ ताकि इसमें अनावश्यक विलंब न हो। साथ ही वर्त्तमान स्थिति से उन्हें यथाशीघ्र अवगत करायें। मंत्री के अलावा कई कनीय अधिकारियों ने भी पीत पत्र लिख कर विभागीय कार्यों में आ रही परेशानियों का जिक्र करते हुए अपने ही सचिव से संचिकाओं का ससमय निष्पादन का सुझाव दिया है। जानकार बताते हैं कि यह स्थिति किसी भी विभाग की कार्य संस्कृति में आयी गिराबट के लिए एलार्मिंग है।
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