दिल्ली:
राजधानी दिल्ली से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली का रहने वाला एक लड़का जिसने पहले अपनी मां को मारा फिर उसके लाश के साथ 4 दिन रहा फिर खुद की जान ले ली। है न हैरान करने वाली बात। उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि क्षितिज ने अपने पीछे 77 पन्ने का सुसाइड नोट छोड़ा है जिसमें उसने उन 4 दिनों के हर एक सेकेंड का जिक्र किया है। इसके अलावा उसने अपने बचपन और अपने परिवार के बारे में भी बताया है।

250 पेज के रजिस्टर में आखरी 77 पन्नों का सुसाइड नोट
आर्थिक तंगी, गरीबी और अकेलेपन से जूझ रहे क्षितिज ने जो दास्तान 250 पेज के रजिस्टर में आखिरी 77 पन्नों में पेंसिल से लिखकर बयां की है, उसे पढ़कर किसी का दिल भी पसीज सकता है। हम उसी सुसाइड नोट की कुछ बातें यहां आपको बताने जा रहे हैं। उसी सुसाइड नोट की कुछ बाते हम यहां आपके सामने बयां करेंगे।
बाइक के केबल से ली मां की जान
क्षीतिज ने अपने सुसाइट नोट में लिखा "आज गुरुवार का दिन है। मां हर रविवार को सत्संग जाती थी। मां रविवार के सत्संग से आई तो थोड़ी कहासुनी हुई, थोड़ा मजाक भी हुआ। उसने आगे लिखा कि मैं पिछले 2 साल से मरना चाहता था लेकिन मरने से पहले अपनी मां को सारे दुखों से मुक्त करना चाहता था। मां की आंखों में जाला आ गया है, लगता है मोतियाबिंद है। अब तो वह मर जाना चाहता है। लेकिन उससे पहले मां को दुखों से मुक्त करना है। मां को मरने में दिक्कत न हो इसलिए बाइक की केबल का इस्तेमाल मां का गले को घोंटने के लिए किया। उसने लिखा जैसे ही मैंने केबल से मां का गला दबाया 3-4 सेकंड के बाद मां जमीन पर गिर गई। मैने मां के सिर को अपने गोद में रखा। मैने कुछ देरतक मां का गला दबाए रखा और खुद का मुंह अपने हाथों से बंद करके बस रोता रहा। मैं गुरुवार दिनभर और पूरी रात रोता रहा है। मुझे पापा की बहुत याद आ रही है। मरने के बाद भी मां की आंखें खुली थीं। मैने बंद करने की कोशिश की, मगर हो न सकीं"।

मां के चेहरे को गंगाजल से धोया और भगवत गीता का पाठ किया
उसने आगे लिखा, आज शुक्रवार है। मां की लाश देखी नहीं जा रही है। मां के चेहरे को गंगाजल से धोया है। मां के पास बैठकर भगवत गीता का पाठ भी किया और बाद में किताब को मां के सीने पर रख दिया। अब बारी है मेरे सुसाइड करने की। सुसाइड करने के लिए पहले मैने पिस्टल खरीदने की कोशिश की। फिर इलेक्ट्रिक कटर का विचार आया है। वो बाजार गया। दो दुकानदारों से इलेक्ट्रिक कटर मांगा। दोनों ने नहीं दिए। क्षितिज ने लिखा है कि पता नहीं वो लोग मुझसे अजीब-अजीब सवाल पूछने लगे तो मैं वापस आ गया। घर लौटकर मां की लाश के पास बैठकर मैं फिर बहुत रोया। क्षितिज बार-बार इसी बात का जिक्र कर रहा था कि पापा होते तो क्या होता।
मां की गर्दन को कटर से काटा
उसने आगे लिखा आज शनिवार है। मां की मौत को आज 71 घंटे हो चुके हैं। मां की लाश से बदबू आने लगी है। मां की गर्दन को कटर से काट दिया है। मां की लाश को घसीट कर बाथरूम में ले गया। दरवाजा बंद कर दिया है ताकि बदबू न आए। वो बस सुसाइड नोट पूरा करना चाहता है। बदबू घर में फैल चुकी है। बिना रूके वह बस सुसाइड नोट लिखता रहा। मैं तीन दिन से भूखा हूं। घर में बदबू फैलती ही जा रही है। मैने घर में अगरबत्ती से लेकर सारे डियो को भी छिड़क दिया है लेकिन बदबू कम नहीं हो रही है। मुझे यह नोट पूरा करना है इसलिए मैं बिना रूके बस लिखता जा रहा हूं।

मां की सहेली से कहा मैने मां के मार दिया
आज इतवार है, मां को सत्संग जाना है। मां की सहेली बार-बार फोन कर रही है। पहले मां के फोन पर, अब मेरे फोन पर घंटी बज रही है। मैंने फोन उठाया। मां की सहेली पूछ रही हैं मिथिलेश फोन नहीं उठा रही हैं, कहां है? उससे कह दिया कि मां तो मर चुकी हैं, उसने 4 दिन पहले ही मार दिया, अब वह मरने की तैयारी कर रहा है। यह सब देखना बहुत डरावना है। पापा के जाने के बाद मां के जीजा ने हमारी देखभाल की थी। मैं चाहता हूं कि मौसी मेरी मां का अंतिम संस्कार करे।