नई दिल्ली
असम जॉइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीम को बड़ी कामयाबी मिली है। टीम ने अभियान चलाकर 24 घंटे में 7 आरोपी पकड़े हैं। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत बनाई गई गुवाहाटी की जॉइंट साइबर कोऑर्डिनेशन टीम (JCCT) हाल के समय में साइबर क्राइम को रोकने वाले अहम केंद्रों में से एक बनकर उभरी है। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी। गुवाहाटी का यह केंद्र एक राष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़ और विशाखापत्तनम भी शामिल हैं। इसे साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट और कई राज्यों से जुड़े मामलों से निपटने के लिए बनाया गया था। एक अधिकारी ने बताया, "गुवाहाटी, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत सात JCCT केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। इससे असम और नॉर्थ-ईस्ट को उन साइबर क्राइम नेटवर्क का पता लगाने के लिए एक खास सिस्टम मिला है, जो राज्य की सीमाओं से बाहर फैले हुए हैं।"

बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान
गुवाहाटी केंद्र की अहमियत उन मामलों में और भी साफ तौर पर दिखी है, जिनमें असम पुलिस ने संदिग्धों की पहचान करने और अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय साइबर इंटेलिजेंस, डिजिटल फोरेंसिक और अंतर-राज्यीय डेटा का इस्तेमाल किया है। अधिकारी के मुताबिक, इसका एक हालिया उदाहरण इस साल जनवरी का है, जब असम CID ने साइबर टिपलाइन से मिली जानकारी के आधार पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाया।

7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया
इस अभियान में असम के छह जिले शामिल थे और सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अभियान की रिपोर्ट के अनुसार, I4C से लाइव फोरेंसिक सपोर्ट और असम CID के तकनीकी विश्लेषण की मदद से आरोपियों को 24 घंटे के भीतर पकड़ लिया गया। अधिकारी ने कहा, "यह मामला गुवाहाटी साइबर क्राइम सिस्टम के एक अहम पहलू को दिखाता है – I4C की भूमिका सिर्फ़ राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए रखने तक सीमित नहीं है। इसकी फोरेंसिक क्षमताओं का इस्तेमाल राज्य की चल रही जांच में किया जा सकता है, जिससे जांच करने वाले अभियान के दौरान ही डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर सकते हैं।"
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