डेस्क:
आजादी की 75वीं वर्षगांठ (75th anniversary of independence) को यादगार बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। इसी पड़ी में इस बार 74 साल पुरानी एक तस्वीर भी बदलने जा रही है। जिससे पूरा देश गौरवान्वित होगा। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री (Prime Minister) के लाल किला पर झंडा फहराने के बाद राष्ट्रगान (National Anthem) बजता है। जिसके साथ-साथ 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है। हर साल यह सलामी ब्रिटेन की 7 तोपों से 21 खास गोले दागकर किया जाता है लेकिन इस साल यह सलामी भारत में बनी ATAGS तोप से दिया जाएगा।

ATAGS को हॉवित्जर भी कहा जाता है
ATAGS का मतलब Advanced Towed Artillery Gun System है। जिसे 25 पाउंडर ब्रिटिश तोपों के साथ देश में बनाया गया है। इस साल 15 अगस्त पर इसकी गूंज से पूरे देश में गूजेंगी। ATAGS को हॉवित्जर भी कहा जाता है। हॉवित्जर यानी छोटी तोपें। अब आप सोचेंगे कि इतनी बड़ी तोप को छोटा कैसे कहा जा सकता है। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध और उसके बाद तक युद्ध में बहुत बड़ी और भारी तोपों को इस्तेमाल होता था। इन्हें लंबी दूरी तक ले जाने और ऊंचाई पर तैनात करने में काफी मुश्किलें होती थीं। ऐसे में हल्की और छोटी तोप बनाई गईं, जिन्हें हॉवित्जर कहा गया।

2013 में बनाने की हुई थी शुरूआत
ये तोप भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं संगठन यानी DRDO की पुणे स्थित लैब Armament Research and Development Establishment (ARDE) ने भारत फोर्ज लिमिटेड, महिंद्रा डिफेंस नेवल सिस्टम, टाटा पॉवर स्ट्रैटेजिक और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने डेवलप किया है। 2013 में इसके डेवलपमेंट का काम शुरू हुआ था और पहला कामयाब टेस्ट 14 जुलाई 2016 में किया गया। इस तोप से 155 एमएम के गोले दागे जा सकते हैं। इसके साथ ही इस तोप से दागे जाने वाले गोलों की रेंज 48 किलोमीटर है, जबकि उसी गोले को बोफोर्स तोप 32 किमी दूर तक दाग सकती है। ये 155 एमएम की कैटेगरी में दुनिया में सबसे ज्यादा दूरी तक गोले दागने में सक्षम है। यह तोप -30 डिग्री सेल्सियस से लेकर 75 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर सटीक फायर कर सकती है।
