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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने पार्टी के सभी पदों और सदस्यता से इस्तीफा (Resignation from posts and membership) दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को सौंपा है। सोनिया गांधी को भेजे अपने त्यागपत्र में उन्होंने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर जमकर हमला बोला है। अपने 5 पन्नों के त्यागपत्र (5 pages resignation letter) में नबी ने कांग्रेस को अनुभवहीन नेताओं की नई मंडली कहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि साल 2013 में जब से राहुल गांधी की पार्टी में एंट्री हुई है तब से पार्टी तबाह हो गई।

राहुल गांधी को ठहराया जिम्मेदार
कांग्रेस को 2024 के आम चुनावों से पहले शायद सबसे बड़ा झटका देते हुए पार्टी के अनुभवी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी को पार्टी में ‘अपरिपक्वता और परामर्श तंत्र को ध्वस्त करने’ के लिए जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कहा कि उन्होंने अनुभवी और सीनियर नेताओं को साइडलाइन कर दिया गया है। वहीं गैर अनुभवी चापलूसों का नया ग्रुप खड़ा हो गया और यही पार्टी को चलाने लगे। बता दें कि आजाद पिछले कई दिनों से हाईकमान के फैसले से नाराज चल रहे थे। बीते 16 अगस्त को कांग्रेस पार्टी ने आजाद को जम्मू-कश्मीर प्रदेश कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया था, लेकिन आजाद ने अध्यक्ष बनाए जाने के 2 घंटे बाद ही इसे अपना डिमोशन बताकर इस्तीफा दे दिया था।
कांग्रेस के फैसले से खुश नहीं थे नबी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 73 साल के गुलाम नबी अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी पड़ाव में पार्टी की कमान संभालना चाहते थे लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी बजाय 47 साल के विकार रसूल वानी को ये जिम्मेदारी दे दी। वानी गुलाम नबी आजाद के बेहद करीबी हैं। वे बानिहाल से विधायक रह चुके हैं। आजाद को यह फैसला पसंद नहीं आया।

जी-23 गुट में भी शामिल थे नबी
गुलाम नबी आजाद लंबे वक्त से कांग्रेस से नाराज थे। वे कांग्रेस के नाराज नेताओं के जी-23 गुट में भी शामिल थे। जी-23 गुट कांग्रेस में लगातार कई बदलाव की मांग करता रहा है। उन तमाम गतिविधियों के बीच इस इस्तीफे ने गुलाम नबी आजाद और उनके कांग्रेस के साथ रिश्तों पर सवाल खड़ा कर दिया है। केंद्र ने इसी साल गुलाम नबी आजाद को पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है।