डेस्क:
ज्योर्तिमठ बद्रीनाथ और शारदा पीठ द्वारका (Jyotrimath Badrinath and Sharda Peeth Dwarka) के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Swaroopanand Saraswati) का निधन हो गया। वो 99 साल के थे। उन्होंने मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर (Narsinghpur of Madhya Pradesh) में आखिरी सांस ली। स्वरूपानंद सरस्वती को हिंदुओं में सबसे बड़ा धर्म गुरु माना जाता था। कुछ दिनों पहले ही स्वरूपानंद सरस्वती ने अपना 99वां जन्मदिन मनाया था। जिसमें CM शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) समेत कई बड़े नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी। उनकी मौत पर प्रधानमंत्री ने शोक जताया है।

प्रधानमंत्री ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया है। उन्होंने लिखा, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। शोक के इस समय में उनके अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। शोक के इस समय में उनके अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति!
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2022
प्रियंका गांधी ने जताया शोक
प्रियंका गांधी ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर शोक जताया और उन्हें याद करते हुए लिखा कि, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के महाप्रयाण का समाचार सुनकर मन को भारी दुख पहुंचा। स्वामी जी ने धर्म, अध्यात्म व परमार्थ के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। साल 2021 में प्रयागराज में गंगा स्नान के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त कर देश व धर्म की और उदारता, सद्भावना पर उनके साथ चर्चा करने का मौका मिला। स्वामीजी ने मेरे पिता के रहते हुए 1990 में हमारी गृहप्रवेश की पूजा कराई थी। ये पूरे समाज के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में स्वामी जी के अनुयायियों को कष्ट सहने का साहस दें।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के महाप्रयाण का समाचार सुनकर मन को भारी दुख पहुंचा। स्वामी जी ने धर्म, अध्यात्म व परमार्थ के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) September 11, 2022
साल 2021 में प्रयागराज में गंगा स्नान के बाद उनका आशीर्वाद प्राप्त कर देश व धर्म की...1/2 pic.twitter.com/bEnsfAnaMv
आजादी की लड़ाई में भी लिया हिस्सा
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का गंगा आश्रम नरसिंहपुर जिले के झोतेश्व में है। उन्होंने रविवार को यहां दोपहर 3:30 बजे अंतिम सांसे ली। स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म एमपी के सिवनी में 2 सितंबर 1924 को हुआ था। वह 1982 में गुजरात के द्वारिका साधक पीठ और बद्रीनाथ के जो ज्योति मटका संघ के शंकराचार्य बने थे। उनके माता पिता ने बचपन में इनका नाम पुतीराम उपाध्याय रखा था। महज 9 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ धर्म की यात्रा शुरू कर दी थी। इस दौरान वो काशी पहुंचे और यहां उन्होंने ब्रह्मलीन श्री स्वामी करपात्री महाराज वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली। स्वामी स्वरुपानन्द सरस्वती ने आजादी की लड़ाई में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने 15 महीने की जेल में सजा काटी। सरस्वती ने यूपी के वाराणसी में 9 और मध्यप्रदेश में 6 महीने जेल की सजा काटी थी।

विहिप और भाजपा को घेरा था
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि न्यास के नाम पर विहिप और भाजपा को घेरा था। उन्होंने कहा कि आयोध्या में मंदिर के नाम पर भाजपा-विहिप अपना ऑफिस बनाना चाहते हैं। जो हमें मंजूर नहीं है। हिंदुओं में शंकराचार्य ही सर्वोच्च होता है। हिंदुओं में सुप्रीम कोर्ट हम ही हैं। मंदिर का एक धार्मिक रूप होना चाहिए लेकिन यह लोग राजनीतिक रुप देना चाहते हैं जो हम लोगों को मान नहीं है।