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पाकिस्‍तान यात्रा-7: धर्मांध आतंकियों के निशाने पर पत्रकार और लेखक

हवेली की तीसरी मंज़िल पर लगे पत्थर पर जूम इन किया तो ॐ के नीचे 1931 लिखा था।

काबुल से जंतर-मंतर तक की मानसिकता में क्‍या फ़र्क़ है कोई

गुण्डा तत्वों को हल्के में लेने का खमियाजा सभ्य समाज को हमेशा भोगना पड़ा

मुहर्रम: आख़िर क्‍या थी कर्बला की कहानी, जिसे भुलाना सदियों बाद भी मुश्‍किल

'मुहर्रम पर दर्दनाक कहानी का पहला हिस्‍सा

विमर्श- आदिवासी भाषाओं का भविष्य इस बात से तय होगा कि घरों में किस भाषा का होता है इस्तेमाल

''जनजातीय भाषा बचाने की कोई दृष्टि या कार्य योजना नहीं

पाकिस्‍तान यात्रा-6: पत्थर मार-मार कर मार डालने के दृश्य मेरी आँखों के सामने कौंधते रहे

एक भारतीय लेखक का पाकिस्‍तान के मुलतान शहर का सफ़र

स्मृति शेष: ऐसे समय राहत का न होना

'एक साल पहले राहत इंदौरी ने आज ही के दिन अंतिम सांस ली थी

साबरमती का संत-7 : न हिंदी, ना  उर्दू, गांधी हिंदुस्‍तानी भाषा के रहे पक्षधर

‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’

साबरमती का संत-6 : आज ही की तारीख़ शुरू हुआ था अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन

''पिछले कुछ सालों की राजनीति धर्म के इर्द-गिर्द सिमट गई है

आदिवासियों के अधिकार के बारे में जानिये क्‍या कहता है UNO का घोषणा पत्र

'विश्व आदिवासी दिवस' 9 अगस्त  को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने 9 अगस्त 1982 को की थी।

विकास के नाम पर संचालित परियोजनाओं के कारण लगभग 10 करोड़ लोग विस्थापित

विश्‍व आदिवासी दिवस पर डॉ. राजू पांडेय का विचारपरक विश्‍लेषण

पड़ाेस: अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान भोगेगा तालिबानी क्रूरता

'भारत का दुर्भाग्य है कि उसका पड़ोसी पाकिस्तान है।

साबरमती का संत-5 : जनता की नब्ज़ पर कैसी रहती थी गांधी की पकड़

11 मार्च 1930 को 78 साथियों के साथ गांधी साबरमती आश्रम से दांडी के लिए 240 मील की पैदल यात्रा पर चल पड़े।

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