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विश्व पर्यावरण दिवस : विकास के नाम पर प्रकृति के विनाश की कहानी

अरस्तू ने कहा था कि प्रकृति की सारी संरचनाएं मनुष्य के लिए निर्मित

विज्ञान, दर्शन और इतिहास से कम जरूरी नहीं है साहित्य

''पिछले दिनों फेसबुक पर एक लेखक ने लिखा कि हिंदी के साहित्यकार दावा करते हैं कि वे जनता के लिए लिखते हैं, जबकि जनता उन्हें नहीं पढ़ती। सचाई यह है कि वे अपने लिए लिखते हैं लेकिन इस बात को स्वीकार नहीं करते। इस तरह की बातें अकसर हिंदी के प्रगतिशील-जनवादी

महारानी: लालू यादव के दौर वाले बिहार में ले जाने वाली वेब सीरीज़

लेकिन इस 'सकता-सकती' वाले मीनमेखी अंदाज़ से अलग यह सीरीज़ आपको अपने साथ जोड़े रखती है, इसमें संदेह नहीं। हां, सीरीज़ में एक मित्र और हैं। विभा रानी की भूमिका छोटी है लेकिन ज़रूरी नाटकीयता से भरी यह भूमिका उन्होंने ऐसे की है कि उन्हें अलक्षित नहीं किया जा

दुमका: वर्षों से डोभा का पानी पीने को विवश अमरपानी गांव के लोग, पक्की सड़क तक की सुविधा नहीं

दुमका जिला अंतर्गत पहाड़िया आदिवासी बहुल गांव अमरपानी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। अमरपानी गांव गोपीकांदर प्रखंड से 12 किमी दूर गोपीकांदर-खरौनी मुख्य मार्ग में स्थित रोलजीह से महज सात किमी दूर है। ये गांव टेंगजोर पंचायत के अंतर्गत आता है। इस गां

'भाजपा सरकार के सात वर्षों के कार्यकाल में देश के अंदर तनाव और टकराव बढ़ा'

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलने वाली भाजपा सरकार के पिछले सात वर्षों के कार्यकाल में देश के अंदर तनाव और टकराव बढ़ा है। सांप्रदायिक तनाव तो बढ़ा ही है, समाज में अन्य तरह के तनाव भी बढ़े हैं। राज्यों के साथ टकराव बढ़ता जा रहा है। पश्चिम बंगाल इसकी ताज़ा नज़ीर

क्या मीडिया अब भी सचमुच लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने का अधिकारी है ?

आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस है। वर्ष 1826 में आज के दिन पंडित युगुल किशोर शुक्ल ने हिन्दी के पहले अखबार 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन शुरू किया था। जनसरोकारों के उद्धेश्य से शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता ने अबतक की अपनी यात्रा में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं। देश की

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