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जामताड़ा : अधिकारियों की नाक के नीचे टनों-टन कोयले की लूट, चौकीदार के हाथ में 'काली कमाई' का मैनेजमेंट!

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​जामताड़ा
जामताड़ा-दुमका मुख्य मार्ग पर, समाहरणालय कंबाइन बिल्डिंग से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर प्रतिदिन चित्रा ECL के डंपरों से टनों कोयला अवैध रूप से उतारा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि कोयला चोरी के बाद वजन बराबर करने के लिए डंपरों में डस्ट और पत्थर भर दिए जाते हैं। जिले के आला अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहे इस काले कारोबार का 'मैनेजमेंट' कथित तौर पर एक चौकीदार के हाथ में है, जिससे स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में इन दिनों सरकारी संपत्ति की खुलेआम लूट मची है, लेकिन स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है।  

​क्या है पूरा मामला?
​जानकारी के अनुसार, चित्रा ईसीएल (ECL) से रोजाना करीब 150 डंपर कोयला लोड होकर जामताड़ा रेलवे साइडिंग के लिए रवाना होता है। लेकिन इस सफर के दौरान उदल बनी और शतसाल ऐसे दो प्रमुख ठिकाने बन चुके हैं, जहाँ डंपरों को रोककर अवैध रूप से कोयला उतार लिया जाता है। कोयला चोरी का यह खेल सुबह 7:00 बजे से शुरू होकर पूरी रात बिना किसी डर के चलता रहता है। डंपरों से उतारे गए इस अवैध कोयले को सैकड़ों मोटरसाइकिलों पर लादकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों और भट्टों में खपाया जा रहा है।
​वजन बराबर करने के लिए पत्थरों का खेल
​इस पूरे काले कारोबार में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डंपरों से सरकारी कोयला चोरी करने के बाद, उसके वजन को बराबर रखने के लिए कोयला माफिया डंपर में डस्ट (धूल) और पत्थर भर देते हैं। इसके बाद इन डंपरों को जामताड़ा रेलवे साइडिंग के लिए रवाना कर दिया जाता है। यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और गुणवत्ता के साथ बड़ा खिलवाड़ है। चौकीदार के हाथ में 'मैनेजमेंट' की कमान, अधिकारी मौनचौकीदार निकला 'काली कमाई' का मैनेजर!
​सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे खेल को सुचारू रूप से चलाने के पीछे जामताड़ा  के ही एक चौकीदार की मुख्य भूमिका है। आरोप है कि इसी चौकीदार के जिम्मे पूरे महकमे को संभालने और 'काली कमाई का मैनेजमेंट' करने का जिम्मा है। नाक के नीचे चल रहा खेल: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उदल बनी और शतसाल, दोनों ही क्षेत्र जामताड़ा-दुमका मुख्य मार्ग पर स्थित हैं। इसी मार्ग से हर दिन जिले के उपायुक्त (DC),  अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी गुजरते हैं। इतना ही नहीं, यह अवैध धंधा कंबाइन बिल्डिंग (समाहरणालय कार्यालय) से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर फल-फूल रहा है।​अधिकारियों की लगातार
आवाजाही और कंबाइन बिल्डिंग के इतने करीब होने के बावजूद इस अवैध कारोबार पर कार्रवाई न होना, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद वरीय अधिकारी क्या कदम उठाते हैं।

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