डॉक्‍टर्स का कहना है, सूअर का हार्ट इसलिए चुना गया क्योकि यह दिल आसानी से उपलब्‍ध हो सकता है। 6 महीने के अंदर इसके दिल इंसानी हार्ट के आकार के मुताबिक बदला जा सकता है। यही वजह है कि कई बायोटेक कंपनियां सूअर के अंगों को विकसित कर रही हैं।