झारखंड के मौसम में उतार चढ़ाव जारी है। दोपहर में तेज धूप के कारण गर्मी का असर रहता है तो शाम ढलते ही सर्दी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है।
60 वर्षीय व्यक्ति देवकी साव ने अपने छोटे बेटे मनोज साव से भरण-पोषण की मांग करते हुए कोडरमा के फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी।
राज्य में ठंड का प्रकोप जारी है। राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में सुबह-शाम ठिठुराने वाली ठंड लोगों को परेशान कर रखी है। वहीं, आज सुबह से अच्छी धूप खिली हुई है और आसमान भी साफ है।
75वें गणतन्त्र दिवस के मौके पर दुमका के पुलिस लाइन में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झंडोत्तोलन किया। इस दौरान सीएम हेमंत ने अपने भाषण में कहा कि झारखण्ड के प्रत्येक वर्ग और समुदाय के अपार स्नेह और आशीर्वाद से लगभग चार वर्ष पूर्व मुझे राज्य की बागडोर संभालन
झारखंड हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद के एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाहित महिला से यह उम्मीद रहती है कि वह अपनी सास या दादी सास की सेवा करेगी। पत्नी अपने पति उनसे अलग रहने का दवाब नहीं बना सकती। जस्टिस सु
झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इसके तहत अब मां की नौकरी के बाद भी पिता पर बच्चों की जिम्मेदारी रहेगी। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि मां भले ही नौकरी करती हो,
सीएम सचिवालय से बंद लिफाफा ईडी दफ्तर पहुंच गया है। इस लिफाफे में क्या है यह स्पष्ट नहीं है। हर बार की तरह एक दूत ईडी ऑफिस सीएम के पत्र को लेकर पहुंचा है। बता दें कि ईडी ने सीएम हेमंत को दो दिन का समय दिया था
खनन पट्टा आवंटन मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ दायर जनहति याचिका को झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया है।
झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र का आज पांचवा और आखिरी दिन है। आज गैर-सरकारी संकल्प के साथ-साथ सरकार सदन में अपना वक्तव्य देगी। सदन में आज हंगामे के काफी आसार है।
1932 विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रदीप यादव ने कहा कि स्पीकर महोदय चर्चा की कोई जगह ही नहीं है
1932 पर ये लोग सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। इन्हें यहां के लोगों से कोई मतलब नहीं है। हमलोग 1932 के साथ आज भी हैं, कल भी रहेंगे। ये बातें सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने कही।
शीतकालीन सत्र के चौथे दिन दूसरी पाली में दोबारा 1932 का विधेयक पारित हुआ। इसके पहले बीते साल 2022 में 11 नवंबर को विशेष सत्र के दौरान यह विधेयक पारित हुआ था। जिसे राज्यपाल ने कुछ सुझाव के साथ संशोधन के लिए विधानसभा और सरकार को लौटा दिया था।