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Followup Special News

साबरमती का संत-45: दक्षिणपंथी राजनेताओं के लिए गांधी राजनीति के अनपच

'दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी अपने किसी भी केवल एक बुजुर्ग का वसीयतनामा नहीं हो सकती थी।

झारखंड पंचायत चुनाव 2021:  चतरा जिले में कौन सा पंचायत किसके लिए है आरक्षित, पूरा लेखा-जोखा

चतरा. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिला प्रशासन की ओर से आरक्षण रोस्टर तैयार किया गया है। आरक्षण रोस्टर के अनुसार कई लोगों का चुनाव लड़ने का सपना पूरा नहीं हो पायेगा। ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने बहुत जल्द त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा करने की

तारीखों में जज उत्तम आनंद हत्याकांड, पढ़िए कब-क्या हुआ

'धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद हत्याकांड केस में अब एक नया मोड़ आ गया है. सीबीआई ने घटना के 83 दिन के जांच-पड़ताल के बाद आखिरकार विशेष अदालत यानी हाई कोर्ट में चार्टशीट दाखिल कर दिया है. बता दें कि ऑटो चालक लखन वर्मा और राहुल वर्मा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (

वे दिन करें याद: जब टेलीविजन का मतलब दूरदर्शन ही हुआ करता था 

रविवार को फीचर फिल्म आती या बुधवार को चित्रहार आता तो लोग दरवाजे-खिड़कियों पर इकठ्ठे हो जाते।

साबरमती का संत-44: बापू ने कहा था-भारत हिन्दू इंडिया नहीं और न कांग्रेस केवल हिन्दुओं का संगठन

गांधी ने कहा-भारत का विभाजन दो सार्वभौम इलाकों का विभाजन है। मूल भारत को दो राष्ट्र क्यों समझा जाए।

जम्मू-कश्मीर में आतंकी क्यों बना रहे हैं आम नागरिकों को निशाना! पढ़िये घाटी के हालात का पूरा लेखा-जोखा

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में तनाव और हिंसा की खबरें बीते कुछ समय से सुर्खियों में है। फरवरी 2020 से लेकर जुलाई 2020 तक जो यथास्थिति घाटी में बनी हुई थी वो अब भंग होती दिख रही है। विशेष तौर पर, बीते 1 माह में जम्मू कश्मीर के शोपियां, पुंछ, राजौरी, कुलग

एक फेसबुकिया पोस्ट ने आखिर कैसे समूचे बांग्लादेश को सांप्रदायिक हिंसा में झोंक दिया

आईएसआई प्रमुख हज़ारों मील दूर कोसोवो में हथियार भेजकर दंगे करवा सकता है, बांग्लादेश में इनके लिए क्या मुश्किल है।

साबरमती का संत-43: मौजू़दा हालातों में गांधी एक बेहतर और कारगर विकल्प

यह बात धीरे-धीरे दुनिया में गहराती जा रही है।

कहानी एक ऐसी पुरनूर शख्‍सियत की, जिसकी आमद में है जश्‍न मिलाद

जिस चीज़ में भी नरमी, रहम, दया, नम्रता होती है, वो इसे और खूबसूरत बना देती है।

साबरमती का संत-42: सभी धर्मों और जातियों की एकाग्रता के प्रतीक थे गांधी, मिलावट के नहीं

बस यही वह बिंदु था जो कुछ संकीर्ण विचारकों को पसंद नहीं आया।

वीर! -3 : सावरकर के माफीनामा की भाषा दीनता की चरम सीमा का स्पर्श

क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?

दस्‍तावेज़-2: अल्बर्ट आइंस्टीन के चर्चित लेख -समाजवाद क्‍यों- की अंतिम किस्‍त

यदि हम स्वयं से पूछें कि मानव जीवन को संभव रूप से ज्यादा से ज्यादा संतोषजनक बनाने के लिए समाज और आदमी की सांस्कृतिक दृष्टिकोण की संरचना को कैसे परिवर्तित किया जाना चाहिए

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