जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में तनाव और हिंसा की खबरें बीते कुछ समय से सुर्खियों में है। फरवरी 2020 से लेकर जुलाई 2020 तक जो यथास्थिति घाटी में बनी हुई थी वो अब भंग होती दिख रही है। विशेष तौर पर, बीते 1 माह में जम्मू कश्मीर के शोपियां, पुंछ, राजौरी, कुलग
आईएसआई प्रमुख हज़ारों मील दूर कोसोवो में हथियार भेजकर दंगे करवा सकता है, बांग्लादेश में इनके लिए क्या मुश्किल है।
यह बात धीरे-धीरे दुनिया में गहराती जा रही है।
जिस चीज़ में भी नरमी, रहम, दया, नम्रता होती है, वो इसे और खूबसूरत बना देती है।
बस यही वह बिंदु था जो कुछ संकीर्ण विचारकों को पसंद नहीं आया।
क्या स्वाधीनता संग्राम को गति देने के लिए सावरकर जेल से बाहर आना चाहते थे?
यदि हम स्वयं से पूछें कि मानव जीवन को संभव रूप से ज्यादा से ज्यादा संतोषजनक बनाने के लिए समाज और आदमी की सांस्कृतिक दृष्टिकोण की संरचना को कैसे परिवर्तित किया जाना चाहिए
'विश्व प्रसिद्ध भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट आइंस्टीन का लेख समाजवाद क्यों? (Why Socialism?) मूल रूप से Monthly Review (मई 1949) के प्रथम अंक में प्रकाशित हुआ था। यह बाद में MR के पचासवें वर्ष को मनाने के लिए मई 1998 में भी प्रकाशित किया गया था।
संसार में केवल गांधी बोले थे कि वे रोज़ अपने को सुधारते हैं। पीढ़ियां और इतिहासकार उनकी आखिरी बात को सच मानें।
क्रांतिकारी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण सावरकर को अंडमान की सेल्युलर जेल भेजा गया था
विचारधारा किसी राजनीतिक पार्टी का ह्रदय स्थल है, उसमें मिलावट या हीला-हवाली की गुंजाइश नहीं होती।
ऐसे महान समाज सुधारक और भविष्यदृष्टा थे, जिन्होंने शिक्षा के लिए जीवन भर प्रयास किया।