' पूंजीवादी शक्तियां भी मार्क्सवाद और गांधीवाद के सिद्धांतों को समझती हैं।
जै़दी साहब के वालिद अलीगढ़ की बातें करते-करते रोने लगते
जनसंख्या पर हो रही बहस के निहितार्थ पढ़िये बहस आबादी की समापन क़िस्त
जनसंख्या पर हो रही बहस के निहितार्थ पहली किस्त
''साम, दाम, दंड, भेद' से चीजों को पा लेना किस किस्म की संस्कृति को विकसित करेगी!
'‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’
1, 5 और 10 की राम मुद्रा
'जिंदगी में हमेशा याद रखें की हम हर वह चीज पा सकते हैं जो किसी और ने पाई हो।
'भारतीय IFS अफ़सर का मालदीव संस्मरण
'ओडिशा सरकार ने पूरे देश में एक पहल करके दिखाई
भारत के एक देशभक्त की कहानी, जो 58 साल की उम्र में सेवा में आया