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Followup Special News

पड़ोसी देश में भारतीय लेखक को जब मिल जाता कोई हिंदुस्‍तानी

असग़र वजाहत का पाकिस्‍तान यात्रा संस्मरण

"आपके पैर बहुत हसीन हैं, इन्हें ज़मीन पर मत रखिएगा, मैले हो जाएंगे...!"

'ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी की जयंती पर ख़ास रिपोर्ट

जानिये उस भगवान को जिनकी डांस स्‍टाइल को बिग-बी ने भी अपनाया

''1951 में हिंदुस्तान में तीन फिल्में रिलीज हुईं : 'आवारा' 'बाजी' और 'अलबेला।'

41वीं पुण्यतिथि पर याद-ए-रफ़ी: मुझको मेरे बाद ज़माना ढूंढेगा....

शहंशाह-ए-तरन्नुम ने गाए 26 हजार गीत

प्रेमचंद ने कभी अपने नाम के आगे मुंशी नहीं लिखा

बांग्ला के लिए रवींद्रनाथ, इंग्लिश के लिए शेक्सपीयर, रूसी के लिए तोल्सतोय का जो क़द होगा वही क़द हिन्दी के लिए प्रेमचंद का है।

झारखंड में सियासत: कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर, क्या हक़ीक़त है और सियासत क्या

विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सत्ता में उलटफेर का फेरा कई सियासी खिलाड़ियों को भारी पड़ने वाला है। 

विडंबना: प्रेमचंद के नाम पर बनी संस्‍था का नाम अंग्रेजी में

2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2 करोड़ रुपये अनुदान के साथ मुंशी प्रेमचंद मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की बुनियाद रखी थी।

प्रेमचंद ने 86 साल पहले कहा था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है साम्प्रदायिकता

'साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है

चायवाले इस बच्‍चे केेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे हौसले जानकर आप हो जाएंगे हैरान

पिता रहे नहीं, लॉक डाउन में मां की नौकरी चली गई जानिये इस बच्‍चे की कहानी

महारानी के लेखक का सवाल: एक दलित, पिछड़ा, महिला को नायक के रूप में कब करेंगे स्वीकार

'याद आते हैं तुलसीदास, जिन्होंने कहा था- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

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