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हूल दिवस विशेष: कैसे लड़े थे वीर सिद्धू-कान्हू-चांद और भैरव, जानिए! हूल क्रांति की पूरी कहानी

30 जून को पूरा झारखंड हूल दिवस के तौर पर मनाता है। इसी दिन भोगनाडीह गांव में हूल क्रांति का आगाज हुआ था। सिद्धो, कान्हू, चांद और भैरव ने इस दिन हूल क्रांति का बिगुल फूंका था। इसमें उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी थीं उनकी दो बहनें फूलो और झानों भी। हूल

भारतीय हिंदी सिनेमा: लता मंगेशकर ने आखिर किन्हें कहा 'ग़ज़लों का बादशाह'

ग़ज़लों के बेहतरीन कंपोज़र और गायक भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते है कि हिंदी-फ़िल्म-संगीत में ग़ज़लों की कंपोज़ीशन मदन मोहन से बेहतर कोई नहीं कर सका।

आप सच्चे मानवतावादी हैं तो सम्भल जाइये! जान बचाकर रहिये! -एक लेखक का सुझाव

'हसन निसार कहते हैं ये दवा और दूध में मिलावट करने वाले ,लोभ में किसी का गला काटने वाले हत्यारे, कम तौल वाले बेईमान इस्लाम की बात करते हैं?

यूं ही कोई मिल गया था......संगीत की दुनिया का वो सितारा जो आस्‍मां में खो गया

'''50 के दौर की कुछ और 'म्यूज़िकली सुपरहिट' फिल्में थीं- 'नया दौर', 'न्यू डेल्ही',' काला-पानी', 'यहूदी',और 'हावड़ा ब्रिज' (1958)। 60 के दशक की कुछ मशहूर फिल्में जो मीनू बाबा की रिकॉर्डिंग का कमाल है।

‘मुझको ये तेरी बेवफाई मार डालेगी....’ जानिये उस गायक की क्‍या थी असली प्रेम कहानी

'अताउल्ला खान का पूरा खेल एक गढ़ी गयी कहानी में छिपा है

सैटेनिक वर्सेज वाले सलमान रुश्दी का लेखन और उनकी प्रेम कहानियां

'तटस्थ नजरिए से देखें तो सलमान रुश्दी का होना यह बताता है कि हम एक में ही कई होते हैं। हममें ही अच्छाइयों की पराकाष्ठा होती हैं और बुराइयों की खाइयां भीं। रुश्दी के चरित्र के ये आयाम कई प्रसिद्ध लेखकों और व्यक्तित्वों की याद भी दिलाते हैं। कुछ साल पहले अप

अखिलेश के दौर में जल उठा बल्‍ब कब तक रोशन कर सकेगा उत्‍तर प्रदेश! UP से एक आकलन

आज फीता काट देना बड़ा आसान है, किसी एक आध गांव में लाइट आ जाने पर अपनी पीठ थपथपाना बड़ा आसान है,मगर ऐसा इंफ्रा डेवलप करना, जिससे यह ख़्वाब पूरे हो सकें, बहुत मुश्किल काम है। हमने यहाँ उनके इसी क्षेत्र में केवल चुटकी भर कामों का ज़िक्र किया है। अखिलेश यादव के

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