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ज़िंदाबाद इंक़लाब-1: भारत ढूंढता है कहां हो भगत सिंह?

हिन्दुस्तान को पूरी आजादी भगत सिंह के अर्थ में नहीं मिली है। भगत सिंह ने तर्क के बिना किसी भी विचार या निर्णय को मानने से परहेज किया।

रांची के इस गांव तक नहीं जाती है पक्की सड़क, खटिया के सहारे हॉस्पिटल पहुंचते हैं मरीज और गर्भवती महिलाएं

' झारखंड की राजधानी रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्यपाल रमेश बैस के आवास से महज 20 किमी दूर नामकुम प्रखंड के सिलवाई पंचायत में एक गांव है गढ़ाटोली। इस गांव से लगते सीसीपीढ़ी और पाहन टोली सहित तकरीबन 1 दर्जन से ज्यादा गांवों तक जाने के लिए कोई पक

साबरमती का संत-22: महात्‍मा गांधी ने उर्दू में लिखी चिट्ठी में आख़िर क्‍या लिखा था!

पहला पत्र 'सारे जहां से अच्‍छा...' लिखने वाले इक़बाल की मौत पर लिखा था

नीर-क्षीर: अनगिनत चूकों के बावजूद कांग्रेस आस, अगर बदलने को हो तैयार

'लगातार भूलों के बाद भी नेहरू-गांधी परिवार पर टिकी कांग्रेस की उम्मीद

यही है हिंदुस्‍तानियत: बौद्ध परिवार के पास उर्दू में रामचरितमानस

 मैंने संस्कृत और उर्दू के अध्येता बलराम शुक्ल से पूछा। उन्होंने कहा कि यह रामचरितमानस ही है।

कामकाजी महिलाओं को सेक्स सिंबल की तरह किसने किया इम्प्लांट

कब बदलेगी महिला को लेकर पुरुष की धारणा

विश्‍लेषण: मोदी के दौरा के बाद अमरीका और भारत के रिश्‍ते की पड़ताल

अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने महात्मा गांधी के अहिंसा संबंधी विचार के हवाले से जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा, और वो टाल गए।अमरीकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी लोकतंत्र की याद दिला दी थी।

विवेक का स्‍वामी-12: मेहनतकश शूद्रों के आधार पर ही खड़ा हुआ इंडो-आर्य समाज का ढांचा

विवेकानन्द के वक्त हिन्दू समाज में भी कई दोष दाखिल हो ही चुके थे। उनकी अनदेखी विवेकानन्द नहीं कर सकते थे। बाल विवाह, जाति प्रथा, वर्ग विभेद और सामाजिक अलगाव जैसी जड़ताओं से उन्हें बेसाख्ता नफरत थी।

साबरमती का संत-21: एक पुस्‍तक के बहाने गांधी और नेहरू  : परंपरा और आधुनिकता के आयाम

'‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’

रूस की सैर इन वन क्‍लिक-7: कितना बदल सका विभक्‍त USSR को लेनिन के बाद का समय

'किसान क्रांति के प्रतीक को आज भी सम्मान प्राप्त है।

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