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Followup Special News

‘द टेल ऑफ़ गेन्जी’ -दुनिया का पहला उपन्यास,  लेखिका का असली नाम कोई नहीं जानता

करीब सौ साल पहले तक दुनिया उसके बारे में जानती तक न थी।1925 में वर्जीनिया वूल्फ ने आर्थर वेली द्वारा किये गए उस उपन्यास के अंग्रेज़ी अनुवाद का रिव्यू न लिखा होता तो शायद ‘द टेल ऑफ़ गेन्जी’ को आज भी लोग नहीं जानते।

साबरमती का संत-20: पंजाब से यूपी तक सैकड़ों चंपारण एक अदद गांधी की जोह रहे बाट

गांधी ने जमानत देने से इनकार कर दिया। न चंपारण छोडूंगा, न आंदोलन छोडूंगा।

विवेक का स्‍वामी-11: भविष्य के लिए युवकों के बीच धीरज के साथ मजबूती से चुपचाप काम करें

स्‍वामी विवेकानन्द की दुनिया और हिन्दुत्व-जातिवाद में मतछुओवाद

संयुक्तराष्ट्र के 76 वें अधिवेशन में अफगानिस्तान के भाग नहीं ले पाने का कारण तालिबान

दक्षेस (सार्क) के विदेश मंत्रियों की जो बैठक न्यूयार्क में होनेवाली थी, वह स्थगित हो गई है। उसका कारण यह बना कि अफगान सरकार का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?

जयंती विशेष: असहमत होकर भी दीनदयाल उपाध्याय के ‘एकात्म मानववाद‘ की उपेक्षा नहीं की जा सकती

'‘हिन्द स्वराज‘ की तरह ’एकात्म मानववाद’ के व्याख्यानों में भी पश्चिमी नस्ल की शासन प्रणालियों की तीखी आलोचना है।

राष्ट्रीय आंदोलन में राष्ट्रकवि के शामिल होने की कोई सूचना नहीं मिलती

प्रोफ़ेसर बनाये गए और फिर राज्‍यसभा सदस्य। लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई। परिवार की पीड़ा से वह कभी मुक्त नहीं हुए।

जयंती: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की भास्वरता

पौरुष और पावक जवानी और रवानी, उर्जा और उमंग के प्रतीक का पर्याय हैं दिनकर

दिनकर: बीसवीं सदी के क्षितिज में एक टोही शब्दयान  

साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए उनकी चयनित पुस्तक थी ‘संस्कृति के चार अध्याय‘। यह याद करना भी रोचक है कि ‘राष्ट्रकवि‘ दिनकर को सन 1973 में जब ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला तो उसकी कसौटी ‘उर्वर्शी‘ बनी थी, नकि ‘हुंकार‘, ‘रेणुका‘, ‘रश्मिरथी या ‘कुरुक्षेत्र‘।

Ground Report: कहां गया 200 करोड़ का पेयजल फंड! आज भी 'डाढ़ी का गंदा पानी' पीते हैं गढ़ाटोली के लोग

''हम लोग कभी चापाकल नहीं देखे हैं सर। गांव में कुआं भी नहीं है। कई बार आवेदन दिए लेकिन चापाकल भी नहीं लगा। क्या करें। डाढ़ी का पानी पीना पड़ता है। पानी गंदा है। इसके कपड़ा से छानते हैं लेकिन उससे क्या होगा। गर्म करके पीते हैं लेकिन हमेशा ऐसा करना संभव नही

रूस की सैर इन वन क्‍लिक-6: साहित्‍यकार की यादों को संजोए हुए उसके नाम से होटल का कमरा

चेखव का चित्र, उनके द्वारा उपयोग किये गए समान, बॉक्स, मेज जैसा मेज, आदि रखा गया है।

विवेक का स्‍वामी-10: विवेकानंद ने कहा था, दलित ही इस देश की रीढ़ की हड्डी

स्‍वामी विवेकानन्द की दुनिया - हिन्दुत्व, जातिवाद और मतछुओवाद

साबरमती का संत-19: ​​​​​​​गांधी के पहले आश्रम के बाजारीकरण की तैयारी, खो जाएगी सादगी

गांधी आश्रम मेमोरियल एंड प्रेसिंट डेवलॅपमेंट प्रोजेक्ट के विरोध में 130 गांधीवादियों ने सरकार को लिखा पत्र

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