करीब सौ साल पहले तक दुनिया उसके बारे में जानती तक न थी।1925 में वर्जीनिया वूल्फ ने आर्थर वेली द्वारा किये गए उस उपन्यास के अंग्रेज़ी अनुवाद का रिव्यू न लिखा होता तो शायद ‘द टेल ऑफ़ गेन्जी’ को आज भी लोग नहीं जानते।
गांधी ने जमानत देने से इनकार कर दिया। न चंपारण छोडूंगा, न आंदोलन छोडूंगा।
स्वामी विवेकानन्द की दुनिया और हिन्दुत्व-जातिवाद में मतछुओवाद
दक्षेस (सार्क) के विदेश मंत्रियों की जो बैठक न्यूयार्क में होनेवाली थी, वह स्थगित हो गई है। उसका कारण यह बना कि अफगान सरकार का प्रतिनिधित्व कौन करेगा?
'‘हिन्द स्वराज‘ की तरह ’एकात्म मानववाद’ के व्याख्यानों में भी पश्चिमी नस्ल की शासन प्रणालियों की तीखी आलोचना है।
प्रोफ़ेसर बनाये गए और फिर राज्यसभा सदस्य। लेकिन उनकी मुश्किलें कम नहीं हुई। परिवार की पीड़ा से वह कभी मुक्त नहीं हुए।
पौरुष और पावक जवानी और रवानी, उर्जा और उमंग के प्रतीक का पर्याय हैं दिनकर
साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए उनकी चयनित पुस्तक थी ‘संस्कृति के चार अध्याय‘। यह याद करना भी रोचक है कि ‘राष्ट्रकवि‘ दिनकर को सन 1973 में जब ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला तो उसकी कसौटी ‘उर्वर्शी‘ बनी थी, नकि ‘हुंकार‘, ‘रेणुका‘, ‘रश्मिरथी या ‘कुरुक्षेत्र‘।
''हम लोग कभी चापाकल नहीं देखे हैं सर। गांव में कुआं भी नहीं है। कई बार आवेदन दिए लेकिन चापाकल भी नहीं लगा। क्या करें। डाढ़ी का पानी पीना पड़ता है। पानी गंदा है। इसके कपड़ा से छानते हैं लेकिन उससे क्या होगा। गर्म करके पीते हैं लेकिन हमेशा ऐसा करना संभव नही
चेखव का चित्र, उनके द्वारा उपयोग किये गए समान, बॉक्स, मेज जैसा मेज, आदि रखा गया है।
स्वामी विवेकानन्द की दुनिया - हिन्दुत्व, जातिवाद और मतछुओवाद
गांधी आश्रम मेमोरियल एंड प्रेसिंट डेवलॅपमेंट प्रोजेक्ट के विरोध में 130 गांधीवादियों ने सरकार को लिखा पत्र