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दिनकर: बीसवीं सदी के क्षितिज में एक टोही शब्दयान  

साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए उनकी चयनित पुस्तक थी ‘संस्कृति के चार अध्याय‘। यह याद करना भी रोचक है कि ‘राष्ट्रकवि‘ दिनकर को सन 1973 में जब ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला तो उसकी कसौटी ‘उर्वर्शी‘ बनी थी, नकि ‘हुंकार‘, ‘रेणुका‘, ‘रश्मिरथी या ‘कुरुक्षेत्र‘।

Ground Report: कहां गया 200 करोड़ का पेयजल फंड! आज भी 'डाढ़ी का गंदा पानी' पीते हैं गढ़ाटोली के लोग

''हम लोग कभी चापाकल नहीं देखे हैं सर। गांव में कुआं भी नहीं है। कई बार आवेदन दिए लेकिन चापाकल भी नहीं लगा। क्या करें। डाढ़ी का पानी पीना पड़ता है। पानी गंदा है। इसके कपड़ा से छानते हैं लेकिन उससे क्या होगा। गर्म करके पीते हैं लेकिन हमेशा ऐसा करना संभव नही

रूस की सैर इन वन क्‍लिक-6: साहित्‍यकार की यादों को संजोए हुए उसके नाम से होटल का कमरा

चेखव का चित्र, उनके द्वारा उपयोग किये गए समान, बॉक्स, मेज जैसा मेज, आदि रखा गया है।

विवेक का स्‍वामी-10: विवेकानंद ने कहा था, दलित ही इस देश की रीढ़ की हड्डी

स्‍वामी विवेकानन्द की दुनिया - हिन्दुत्व, जातिवाद और मतछुओवाद

साबरमती का संत-19: ​​​​​​​गांधी के पहले आश्रम के बाजारीकरण की तैयारी, खो जाएगी सादगी

गांधी आश्रम मेमोरियल एंड प्रेसिंट डेवलॅपमेंट प्रोजेक्ट के विरोध में 130 गांधीवादियों ने सरकार को लिखा पत्र

रूस की सैर इन वन क्‍लिक-5: 1000 साल पुराना शहर, एक गांव और क़स्‍बा

'सुजदाल में एक चर्च का सम्पूर्ण कार्यभार औरतों के हाथ में है। वे हैं पादरी हैं और व्यस्थापक भी।

साबरमती का संत-18: ​​​​​​​अहिंसा सिर्फ कमज़ोरों की ताक़त नहीं, वीरों का आभूषण भी है-बापू कहते थे

बंग्‍लादेश, सीमांत गांधी, जनरल शहनवाज़ और पटना से जुड़े महात्‍मा गांधी के प्रसंग

विवेक का स्‍वामी-9: सच्चे अर्थों में शिक्षित होने से ढकोसलों और रूढ़ियों से मिलेगी मुक्‍ति

'पूर्वग्रहों और समूचे अज्ञान को लेकर दिमाग को आधुनिकता में रोशन करना मुश्‍किल

गांव केेेेेेेेेेे ठेले तक पहुंचा मोमो-चाऊमीन, इतिहास होते चले गए पारंपरिक भोजन

पूछिए साबूदाना कैसे बनता है या हींग कहाँ से निकलती है। अगर कोई बच्चा दिखे तो उससे पूछिए बेसन और आटा कहाँ से आता है या पॉपकॉर्न कहाँ उगता है।

रूस की सैर इन वन क्‍लिक-4: दुबई से आगे निकलता हुआ 20 साल में नया मॉस्को

''19 को चुनाव सम्पन्न हुआ मगर कहीं किसी नेता का कटआउट, पोस्टर या प्रचार न दिखा।

साबरमती का संत-17: संभवतः बिहार की इकलौती जगह जहां गांधी 81 दिनों तक रहे

महात्‍मा गांधी की यादगार पटना के एएन सिन्हा इन्स्टिट्यूट में गांधी जयंती के लिए अनुमति में दिक्‍कत

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