इस समय अफगान-संकट के मूल में तो अमेरिका ही है।
खबरों का ‘तालिबानीकरण’ यानी प्रतिरोध को नपुंसक बनाने का षड्यंत्र
अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के वादे के साथ सत्ता में काबिज हुआ तालिबान अब अपना असली रंग दिखाने लगा है। तालिबान में नई सरकार का गठन हो चुका है। जैसा की आशंका था, कैबिनेट में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है, जबकि तालिबान न
लड़की ने फोन पर अपनी मां को बताया है कि वह यहां फंसी हुई है, उसके जान को खतरा है।
अमेरिका ने 48 घंटे के अंदर काबुल एयरपोर्ट पर हमले का बदला ले लिया है। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में ISIS-K के ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। काबुल एयरपोर्ट पर हुए बम विस्फोट में 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। अमेरिका ने लोगों से काबुल एयरपोर्ट के गेट को ज
तालिबान का अर्थ है ज्ञानार्थी। लेकिन इन लोगों के लिए ज्ञान का अर्थ केवल इस्लामी ज्ञान है।
काबुल एयरपोर्ट से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर कई महिलाओं को गोली मार दी गई है। सूत्रों के मुताबिक़ उन महिलाओं ने हिजाब नहीं पहना था। हालांकि अभी तक तालिबान ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इस घटना के बाद एयरपोर्ट पर भ
अफगानिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। टीवी, अखबार और सोशल मीडिया अफगानिस्तान में हिंसा और संघर्ष की तस्वीरों से भरा पड़ा है। शहर की सड़कें और गलियां गोलियों की तड़तड़ाहट और धमाकों से गूंज रही है। हर तरफ अफरातफरी है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अफगानिस
गुण्डा तत्वों को हल्के में लेने का खमियाजा सभ्य समाज को हमेशा भोगना पड़ा