RSS प्रमुख मोहन भागवत का हाल में दिया गया बयान चर्चा में है। जिसमें उन्होंने 75 की उम्र के बाद दूसरों को मौका देने की बात कही है। इस बयान ने देश की सियासी हलचलों को हवा दे दी है और ये बयान जंगल में आग की तरह फैल रहा है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत का हाल में दिया गया बयान चर्चा में है। जिसमें उन्होंने 75 की उम्र के बाद दूसरों को मौका देने की बात कही है। इस बयान ने देश की सियासी हलचलों को हवा दे दी है और ये बयान जंगल में आग की तरह फैल रहा है।
प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस का मुहावरा पसंद है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस यानि एक ऐसी दुनिया की कल्पना है जिसमें प्रक्रियाएं तेज़ हों, अनापत्ति प्रमाणपत्र ऑनलाइन मिलें, और ज़मीन के कागज़ एक क्लिक पर ट्रांसफर हो जाएं।
चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये। ये आनंद बख्शी की लिखी लाइन है। लेकिन बिहार की सियासत में जो चिंगारी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच भड़की है, उसे यहां कि झमाझम बारिश भी नहीं बुझा पा रही। चुनाव की तरफ बढ़ रहा बिहार का सियासी मिजाज दिन प्रतिदिन
राजमहल के पहाड़ियों को यदि पता होता कि सिराजुद्दौला और उसके साथियों की लड़खाड़ती और थकी चाल को संभालने से उनकी आने वाली पीढ़ी की आज़ादी बहाल रहती तो संभव था कि उनका व्यवहार कुछ और होता। सत्रहवीं सदी के मध्य में देश के हालात क्या थे, उन्हें नहीं पता था।उन्हें ज
पटना विश्वविद्यालय आजकल चर्चा के केंद्र में है, अच्छी शिक्षा, गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण और कभी विचार विमर्श का केंद्र कहा जाने वाला ये विश्वविद्यालय अब सेशन लेट, संसाधनों की कमी जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। कभी ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इस विश्वविद्यालय स
पटना का अटल पथ तो जैसे खूनी पथ हो गया है। तेज और बेतहाशा रफ्तार से चलने वाली गाड़ियां किसी को भी कुचलते हुए आगे बढ़ सकती हैं। न प्रशासन का कोई खौफ और न ही सरकार बहादुर का, तिस पर से गाड़ी पर यदि सत्तारूढ़ दल (भाजपा) का झंडा लगा हो तब तो जनता खुद को बचाकर
चुनावी रण में उतरने से पहले तमाम पार्टियों की कोशिश ये रहती है कि उसके नेतृत्व की बागडोर किसी ऐसे हाथ में हो, जिससे कई समीकरण एक साथ साधे जा सकें। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले RJD ने अपने प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कर लिया है और मंगनी लाल मंडल के नाम पर मुहर ल
झारखंड की राजधानी रांची में रातू रोड फ्लाइओवर बनकर तैयार है। आगामी 19 जून को इसका उद्घाटन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा निर्धारित है।
झारखंड की राजनीति इन दिनों एक ऐसे विषय के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसे अगर ठीक से समझा जाए तो यह न केवल राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रश्न है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा के लिए भी एक कसौटी-परीक्षण है।
"हिंदी साहित्य में कहां है मुस्लिम समाज?" इस सवाल को शोध का विषय बनाकर सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज, मुंबई से जुड़े मुख्तार खान ने एक महत्वपूर्ण शोधकार्य पूरा किया है। उनके शोध “1980 के बाद की हिन्दी कहानियों में मुस्लिम समाज का समाजशास्त्रीय अनुशीलन” को मुंबई वि
ईद-उल-अजहा हर साल कुर्बानी की याद दिलाता है। भारत में इसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।