एक बच्ची के साथ एक मौलाना ने सारी हैवानियत की हदों को पार कर दिया। तबीयत ठीक करने के नाम पर बच्ची के साथ इस कदर दरिंदगी की कि बच्ची की स्थिति गंभीर हो गई है। जिसके बाद उसे रिम्स में भर्ती कराना पड़ा है।
चतरा में वन विभाग की टीम ने अवैध कोयला तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मिली जानकारी के मुताबिक वन प्रमंडल पदाधिकारी को सूचना मिली थी कि एक ट्रक में अवैध कोयला लदा है। सूचना के आधार पर वनपाल प्रभात कुमार ने सिमरिया-चतरा मुख्य मार्ग स्थित कुंदरी गांव
चतरा में एक तिलक समारोह में दावत खाने के बाद कहा जा रहा है कि लगभग पांच सौ लोग बीमार हो गये हैं। मामला हंटरगंज प्रखंड के वशिष्ठनगर के पिपरपांती मोहल्ले का है।
इटखोरी थाना क्षेत्र के परसौनी गांव में शनिवार को एक जमीन को लेकर दो पक्षों मे जमकर पत्थरबाजी हुई। स्थानीय पुलिस प्रशासन दखल के बाद विवाद शांत हुआ है। हालांकि, तनाव अभी भी कायम है। किसी को चोट नहीं आयी है। दरअसल परसौनी गांव में कब्रिस्तान तथा खेल मैदान को
आमतौर पर घर के बच्चे अगर कोई बड़ी गलती करते हैं तो घरवाले उसे छुपाते हैं। कोई पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ी गलती हो तब तो घरवाले बात को और ज्यादा दबाते हैं ताकि उनका बच्चा जेल ना चला जाए। लेकिन चतरा से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है जहां एक बहन अपने ही भाई
हंटरगंज प्रखंड में 2 अलग-अलग गांव में 2 लोगों की डूबने से मौत हो गई। डूबने वालो में एक महिला तथा दूसरा नाबालिग बच्चा शामिल है। महिला का शव कुआं और बच्चे का शव तालाब से बरामद हुआ है। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। एक घटन
तीन पुलिसकर्मी दोषी पाये गये, निलंबित किया गया है और दो सहायक पुलिस को पुलिस लाइन हाजिर किया गया है।
प्यार हर कोई करता है चाहे वह पुलिस वाला हो या कोई आम आदमी। यह प्यार जोरी थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर दीपक कुमार पर भारी पड़ गया। उन्होंने प्यार में पड़कर अपनी प्रेमिका से शादी तो कर ली लेकिन अब वो मुसीबत में पड़ गए हैं। वे ससुराल वालों से डरकर पुलिस से सुर
चतरा की पहचान जल्द ही बदलने वाली है। कभी नक्सलियों की शरण स्थली मानी जाने वाले चतरा में अब दुनिया का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप बनने जा रहा है। इटखोरी में अब दुनिया के कई देशों से लोग भ्रमण करने आयेंगे। पर्यटन विभाग ने स्तूप और प्रेयर व्हील निर्माण की डिजाइन त
आजादी के 73 साल बाद भी जब कई गांवों से पाषाण युग वाली तस्वीर सामने आती है तो मन व्यथीत हो जाता है। गांवों की बदहाल स्थिति देखकर सिस्टम की लाचारी और लापरवाही का पता चलता है। बातें तो आदर्श और स्मार्ट गांव की होती है लेकिन अब भी कई गांव वैसे हैं जहां जीवन ज
हम मेहनत वालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया, सागर ने रस्ता छोड़ा पर्वत ने शीश झुकाया ,फ़ौलादी हैं सीने अपने फ़ौलादी हैं बाहें ,हम चाहें तो पैदा कर दें, चट्टानों में राहें। इन पंक्तियों का एक एक शब्द प्रतापपुर ब्लॉक के बभने बाल के में ग्रामीणों पर सटीक बैठता है।