डाॅ. लोहिया की पुस्तक ‘‘इतिहास चक्र‘‘ में छोटे पैमाने पर इतिहास, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र से सम्बन्धित विचार उपस्थित
लोहिया को आजा़दी के बाद सरकार ने 16 बार जेल की हवा खिलाई थी। यह अलग बात है कि विरोधाभास में नेहरू ने अपने सबसे कटु आलोचक की निंदा करते भी एक तरह का सम्मान दे दिया था।
गांधीवादी लेखक कनक तिवारी के मार्फत लोहिया को समझने की कोशिश
लोहिया लिखते हैं-‘‘नागरिक स्वाधीनता की रक्षा के लिये सभी प्रकार की खाइयां खोदनी चाहिये और किले बनाने चाहिये।
संदर्भ लोहिया को समझने की कोशिश
नारी के लिए लोहिया के मन में आदर देने की ललक थी। वे पूरी दुनिया लेकिन भारत में ज़्यादा नर नारी की गैरबराबरी को लेकर परेशान थे।
लोहिया के जीवनकाल में ही जनसाधारण और गरीब लोग उन्हें महात्मा गांधी के बाद अपना सबसे बड़ा मसीहा मानने लगे थे।
आपने खबर पढ़ी होगी कि कुछ दिन पहले भारतीय रेलवे की ओर से रामायाण स्पेशल ट्रेन का परिचालन शुरू किया गया था। इस ट्रेन के जरिए यात्रियों को भगवान श्रीराम से जुड़े स्थानों की यात्रा करवाई जा रही है। अयोध्या, सीतामढ़ी और चित्रकूट सहित अन्य धार्मिक स्थलों की सै
वामपंथ के शीर्ष नेता नम्बुदिरिपाद से लोहिया की एक मायने में पटरी नहीं बैठती थी। इसलिए नहीं कि नम्बुुदिरिपाद में और किसी मुद्दे को लेकर उसे मतभेद था। वह चीन के भारत पर आक्रमण के मुद्दे को लेकर तो था ही।
संविधान में तो मूल अधिकारों के अमल की दुर्गति तथा पंचायती राज और राष्ट्रभाषा की अवधारणा का विलोप भी है।
गांधीवादी लेखक कनक तिवारी के माध्यम से लोहिया को समझने की कोशिश
किशन पटनायक के साथ लोहिया के निकट रहे बुद्धिजीवी और अब देश के सबसे बुजुर्ग समाजवादी सच्चिदानंद सिन्हा